बाढ़ की आपदा -
पुनर्वास
और मुआवज़ा अधिकारों के लिए
जन-आंदोलन
चंडीगढ़: 5 सितंबर
को भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्राहां) द्वारा पंजाब के बाढ़ प्रभावित किसानों और
मज़दूरों समेत सभी लोगों के लिए पूर्ण और
पर्याप्त मुआवज़ा और पुनर्वास की मांगों को लेकर अपने सक्रियता क्षेत्र के 16
जिलों में जिला/उप-मंडल अधिकारियों के माध्यम से पंजाब और केंद्र
सरकार को ज्ञापन भेजा गया। संगठन के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां और उप-सचिव
जगतार सिंह कालाझाड़ द्वारा एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह जानकारी
देते हुए बताया गया कि आज इस मुद्दे पर 14 जिलों में डीसी
कार्यालयों और 15वें जिले में 2 उप-मंडल
कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन करने के बाद अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया।
इन प्रदर्शनों में महिलाओं और युवाओं सहित बड़ी संख्या में किसानों मज़दूरों ने
भाग लिया। संगरूर में अपने संबोधन के दौरान श्री उग्राहां ने आरोप लगाया कि बाढ़
की भविष्यवाणी के बाद भी लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए कोई तत्काल प्रबंध नहीं
किए गए, बल्कि बाढ़ की चपेट में आ जाने के बाद भी कई दिनों
तक किसी भी सरकार ने विस्थापित हुए, मारे गए और
फसलों/मकानों/पशुधन आदि का भारी नुकसान झेलने वाले लोगों की खबरसार नहीं ली। बाढ़
के कारण टूटे और टूट रहे बांधों की मरम्मत और बचाव के प्रबंध भी अधिकांश स्थानों
पर पीड़ितों की सहायता कर रहे लोगों अथवा खुद
पीड़ितों द्वारा ही किए गए हैं। बाढ़ के कारण उजड़े लोगों के आश्रय, राशन, तिरपाल और पशुओं के लिए चारे आदि के प्रबंध भी
शुरुआती दिनों में बड़े पैमाने पर आम लोगों द्वारा ही किए गए, जो लगातार जारी हैं। बाढ़ आपदा का सामना करने के इन राहत कार्यों में
युवाओं के जज्बे और उत्साह की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। ज्ञापन में तत्काल राहत
की मांगों के संबंध में वक्ताओं ने कहा कि पंजाब, हिमाचल
प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड व
अन्य स्थानों पर बादल फटने व भारी वर्षा के कारण बड़े पैमाने पर हुए जान-माल,
फसलों, मकानों व जमीनों के विनाश को यद्यपि
पंजाब सरकार ने देर आए दुरुस्त आए के अनुसार राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है
लेकिन केंद्र सरकार द्वारा भी इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाना चाहिए। इस के
लिए राष्ट्रीय आपदा निधि जारी कर बड़े पैमाने पर तत्काल राहत कार्यों को आगे
बढ़ाया जाए। जिन परिवारों के सदस्यों की जान इस कारण गई है, उन्हें
भारी आर्थिक सहायता प्रदान कर सांत्वना दी जाए। पशुधन व अन्य सहायक व्यवसायों का
नुकसान, मकानों, फसलों व जमीनों वगैरा
का विनाश झेलने वाले लोगों के नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई के लिए पर्याप्त धनराशि
तुरंत जारी की जाए। आवश्यक बुनियादी ढाँचे, सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों को
हुए नुकसान की मरम्मत के लिए भी धनराशि जारी की जानी चाहिए और पानी उतरते ही
पुनर्निर्माण कार्य शुरू किये जाने चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को वर्षा जल प्रदूषण से
उत्पन्न होने वाली और बड़े पैमाने पर फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए उच्च
स्तर पर निवारक उपाय करने चाहिए। वर्षा ऋतु से पहले नदियों, नालों,
बाँधों और बाढ़ द्वारों आदि की जाँच, सफाई,
मरम्मत इत्याद में की गई
घोर लापरवाही भविष्य में नहीं दोहराई जानी चाहिए। ऐसी लापरवाही के दोषी राजनीतिक
नेतृत्व और नौकरशाही की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें लोगों के जीवन और संपत्ति
से खिलवाड़ करने के लिए कड़ी सजा दी जानी चाहिए। पंजाब की नदियों और नहरों के
किनारों, बाँधों और बाढ़ द्वारों आदि का सम्पूर्ण ढाँचा
पुराना और जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। वर्तमान समय में विकसित हो चुकी नई तकनीक का
उपयोग कर इसका पूर्ण नवीनीकरण किया जाना चाहिए। इसके अलावा, नदी
और नहर के पानी के संरक्षण और उपयोग तथा इसे हर खेत तक पहुँचाने के लिए उचित
व्यवस्था की जानी चाहिए। अतिरिक्त वर्षा जल के भूमि में पुनर्भरण के लिए, प्रत्येक नदी और नहर के किनारे विभिन्न स्थानों पर कच्चे तल वाले तालाबों
में चौड़े और गहरे बोरहोल खोद कर एक नया ढांचा निर्मित किया जाना चाहिए। इस
उद्देश्य की पूर्ति के लिए पंजाब और केंद्र सरकारों द्वारा बड़ी बजट राशि आरक्षित
की जानी चाहिए। इस प्रकार, बाढ़ की स्थायी रोकथाम के लिए
आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए और बाढ़ की मार पड़ने पर राहत उपायों के लिए पर्याप्त
धनराशि रखी जानी चाहिए। ग्लोबल वार्मिंग में लगातार वृद्धि, जंगलों
और पहाड़ों की बड़े पैमाने पर की जा रही कटाई और पर्यावरण/जलवायु/जल में फैलाया जा
रहा प्रदूषण कॉर्पोरेट विकास मॉडल का परिणाम है। बादल फटना, बाढ़
की भीषण मार और तूफानों से होने वाली तबाही जैसी तमाम घटनाएँ प्रकृति के साथ किये
जा रहे इसी खिलवाड़ का नतीजा हैं। इसलिए कॉर्पोरेट विकास मॉडल से प्रेरित नीतियों
को रद्द किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने दावा किया कि भले ही पंजाब सरकार को लैंड
पूलिंग नीति के मामले में मुँह की खानी पड़ी है लेकिन साथ ही, वह पंचायती ज़मीनों और अन्य सरकारी ज़मीनों/संपत्तियों को नीलाम करने के
रास्ते पर चल पड़ी है। ऐसी सभी संपत्तियाँ लोगों की सेवा, रखरखाव
और उपयोग के लिए हैं। इसलिए चेतावनी दी गई कि पंजाब सरकार लोगों की ज़मीनें और
संपत्तियाँ छीनने की नीति पर अमल करने से बाज आए, अन्यथा
जन-संघर्षों का सामना करने के लिए तैयार रहे। विभिन्न स्थानों पर सभाओं को संबोधित करने वाले वक्ताओं में राज्यस्तरीय
नेता श्री उग्राहां और श्री कालाझार के इलावा संबंधित जिलों के प्रमुख नेता जनक
सिंह भुटाल, हरदीप सिंह टल्लेवाल और हरिंदर कौर बिंदु शामिल
थे।
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