सुर्ख रेखा
(जनवरी-२०१२)
क्रांतिकारी वर्ग संघर्ष तथा विधान सभा चुनावों के संबंध के बारे में
कुछ टिप्पणियां
इस अंक में
-असल मुकाबलाः बड़ी जोंकों का असेम्बलि कैंप- लोगों का संघर्ष कैंप
-वोट के अधिकार की असल हैसियत
-साम्राज्यवादी-सामन्ती व्यवस्था के क्रांतिकारी विकल्प का रास्ता पकड़ो
-विकल्पिक प्रोग्राम-विकल्पिक रास्ता
मई दिवस के महान शहीदों को
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मई दिवस की ऐतिहासिक घटनाओं के बाद अमरीकी पूंजीपति वर्ग की ¥ôÚU से मज़दूर वर्ग ·¤ô ·é¤¿ÜÙð के लिए ÖØ¢·¤ÚU हमले हुए। सरकारी àææâ·¤ô´ पूंजीपति लुटेरों, पुलिस अत्याचारियों, 碷¤ÚUÅðUÙ के गुंडा-गिरोहों और बुर्जुआ प्रैस ने बल और छल के सभी रिकार्ड तोड़ डाले। लाठियों, गोलियों, छंटनियों, कुर्कियों, जेलों, çßSÍæÂÙô´ का तूफान दिया। इन अत्याचारी हमलों के कारण एक बार मज़दूर ¥æ‹¼ôÜÙ ·¤ô ¼Õæ ç¼Øæ »ØæÐ 11 नवंबर 1887 को चार योद्धायों को फांसी पर लटका दिया गया ।
सरकारी àææâ·¤ ÌÍæ उनके चाटुकार इस Öý× में थे कि अब मज़दूर अपने साथियों की अंतिम रस्मों के समय दो - चार सौ से अधिक नहीं आऐंगे। इसी लिए उन्होंने पारसनज, स्पाईज, एंजलज, फिशर और लिंग की लाशों को उनके दोस्तों और रिश्तेदारों को सौंप ç¼ØæÐ उन को खुलेआम अंतिम ÚUS×ð´ अदा करने की इजाज़त दे दी परन्तु ÂýçÌÕ¢Ï Ü»æØð »Øð कि यह समय दो घंटो का ही होगा। वह गलियां भी सरकारी ¥çÏ·¤æçÚUØô´ ने तय की, जिन में से जनाज़ा çÙ·¤ÜÙæ था। लेकिन ताकत और नशे के भ्रम में ¿êÚU àææâ·¤ नहीं जानते थे कि मज़दूर और मेहनतकश लोग अपने शहीदों को कितना प्यार करते हैं। कुछ âר के लिए वे भले ही दब ज़रूर गए थे Âý‹Ìé भयानक से भयानक हमले भी मज़दूर दिलों में से अपने लोकप्रिय नेताओं का मान-सम्मान कम नहीं ·¤ÚU सके थे। इसी कारण मज़दूरों और मेहनतकश लोगों की ¥ôÚU से अपने महान शहीदों को दी ·ý¤æ¢çÌ·¤æÚUè विदाई ने उन को फिर हैरान-परेशान कर दिया।
यह श्रद्धाँजलि मार्च ßæSÌß ×ð´ अनूठा और देखने योग्य था। कोई शोकार्त्त गीत नहीं, कोई मातमी संगीत नहीं। कोई हार का एहसास नहीं। सब से आगे एक ¥ÏðǸU आयू का, सलेटी चेहरे वाला जुझारु, लाल झंडा उठा फ़ौजी मटक के साथ चल रहा था। फिर अर्थी, ढोल वाली »æçǸUØæ¢ और ताबूत