Friday, December 27, 2013


पंजाब में गदर-शताब्दी अभियान



कुछ झलकियाँ




सुर्ख-रेखा प्रकाशन

(दिसम्बर, 2013)
इस पैम्फलेट में

-आओगदर लहर की संग्रामी विरासत को और रौशन करें            3
-गदर लहर में औरतों की शानदार भूमिका               7
-किसान-मजदूर संगठनों द्वारा संयुक्त गदर शताब्दी अभियान     11
-गदर-शताब्दी अभियान सम्पन्न             19
आओगदर लहर की संग्रामी विरासत को और रौशन करें
यह वर्ष गदर पार्टी की स्थापना का 100वँ वर्ष है। पहली नवम्बर 1913 को अमरीका गए प्रवासी पंजाबियों द्वारा सि का गठन किया गया था। इन प्रवासी पंजाबियों का बड़ा हिस्सा जाट-किसानी में से थाजिसे बरतानवी साम्राज्यवाद तथा उनके देसी पिट्ठूओं जागीरदारोंसूदखोरोंसाहुकारोंव्यापारियों की बेहिसाब लूट-मार और उत्पीडऩ ने जर्जर कर दिया था और आर्थिक तौर पर बुरी तरह तोड़ दिया था। अपनी बद्तर जिन्दगी को चन्द सिक्कों का सहारा देने के लिए किसानी के एक हिस्से ने अमरीका तथा कैनेडा की ओर रुख किया। कुछ हिस्से ने तुच्छ गुजारे के लिए गोरे साम्राज्यवादियों की सेना में भर्ती होकर बस्तियों में उनके जंगी अभियानों का शिकार बनना स्वीकार किया तथा कईयों को सिंगापुरबर्मामलायाचीन आदि में अंग्रेज अफसरों और धनी लोगों के बंगलों में नौकर होने का पेशा चुनने के लिए मजबूर होना पड़ा।
विदेशों की ओर उमड़े पंजाबियों को अमरीका कैनेडा में तुल्नात्मक ऊँचे वेतन पर काम मिलने से कुछ आर्थिक राहत तो नसीब हुईपरन्तु उस बेइजतीजलालत एवम् राष्ट्रीय हीन-भावना के अहसास ने उनका पीछा  छोड़ा जो भारतीय लोगों की गुलाम जिन्दगी की पैदाइश थी। यहां भी उन्हें नसली भेदभाव का साना करना पड़ा। गुलाम राष्ट्र को आजाद देश के लोगों द्वारा कसे जाते तानों की पीड़ा सहनी पड़ी। होटलों में लिखा, ''यहां कुत्तों तथा भारतीयों का आना मना हैपढ़ कर राष्ट्रीय स्वाभिमान और देशभक्ति की भावना को झिंझोड़ कर जगा दिया। विदेशी लूट तथा उतपीडऩ के खिलाफ नफरत और आक्रोश को प्रज्वलित किया तथा उन्हें इस बात का बोध करवाया कि बर्तानवी साम्राज्य की जंजीरों से मुक्त हुए बिना गुलाम भारतीयों को आजाद फिजा में सांस लेने और एक बेहतर जीवन जीने के सपने लेने का भी अधिकार नहीं है। अपने देश को गोरे साम्राज्यवादियों से मुक्त करवाने के लिए उन्होंने अमरीका और कैनेडा में पंजाबी प्रवासियों को एकजुट किया और 13 अप्रैल 1913 को गदर पार्टी की स्थापना का परचम उठाया गया। सोहन सिंह भकना को गदर पार्टी का प्रधान चुना और लाला हरदियाल को इस का जनरल सचिव चुना गया। इसके अतिरिक्त कईयों को कमेटी सदस्य चुना गया। गदर पार्टी द्वारा 1 नवम्बर 1913 को गदर पत्रिका का पह्ला अंक छपवाकर जारी किया गया। इसलिए बाद में गदर पार्टी द्वारा 1 नवम्बर 1913 को ही पार्टी स्थापना दिवस स्वीकृत कर लिया गया।
गदर पार्टी का उद्देश्य भारत को बर्तानवीय साम्राज्यवाद से मुक्त करवानासमानताआजादी और भाईचारे पर आधारित जनवादी राज की स्थापना करनाधर्म और सियासत को अलग करते हुए धर्म-निरपेक्ष नीति का पालन करनाजात-पात पर आधारित पक्षपात समाप्त करना तथा इस के साथ ही औरत-मर्द बराबरी वाला सामाजिक-राजनीतिक निजाम स्थापित करना था। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कांग्रेस की अंग्रेजों के साथ मिलकर चलने की नीति को रद्द करते हुएउनके द्वारा हथियारबद्ध बगावत के मार्ग को चुना गया तथा सभी प्रवासियों को देश में वापिस  कर गावत को संगठित करने का खुला निमन्त्रण दिया गया। बहुत सारे प्रवासियों द्वारा देश वापिस पहुँच कर विभिन्न सैनिक छावनियों में फौजियों से सम्पर्क स्थापित करने और उनको $गावत के लिए तैयार करने के लिए दिन-रात एक कर दिया गया।
अगस्त 1914 को अंग्रेज एवम् जर्मन साम्राज्यवादियों के बीच जंग के ऐलान से विश्वयुद्ध शुरू हो गया। अंग्रेज साम्राज्यवादियों का जंग में उलझे होना और अन्तर-साम्राज्यवाद जंग का फायदा लेने के लिए गदर पार्टी द्वारा 21 फरवरी 1915 को गावत करने का निर्णय किया गया। दुश्मन को इस योजना का पता चल गया। इस पर गावत की तिथि बदल कर 19 फरवरी कर दी गई। अंग्रेज शासकों द्वारा राजाओं-रजवाड़ोंजागीरदारों और उनके मुखबरों की मदद से गदर पार्टी की बगावत कर देने की कोशिशों को बेहिसाब अत्याचारों से कुचल दिया गया। अनेकों गदरियों को ग्रिफतार कर लिया गया। पुलिस यातना-केन्द्रों में अत्याचारों के बाद अदालती कार्यवाइयों में घसीटा गया। 11 गदरी जुझारूओं को फांसी दी गई, 8 देशभक्त जोलों में भुख हड़ताल के दौरान शहीद हो गए, 306 गदरी योद्धाओं को उम्र कैद की सजा हुई और कालेपानी की अमानवीय जेलों में नर्क भोगना पड़ा। 77 गदरीयों को विभिन्न अवधियों की जेल सजाएँ हुईं।
अंगे्रज शासकों की दरिन्दगी की सभी हदें पार किया हुआ यह भीषण अत्याचार फांसियों और मौत से निर्भय रहने वालेपुलिस यातना केन्द्रों तथा जेल की काल कोठरियों में शेरों की तरह दहाड़ते गदरी योद्धाओं के दृढ़ निश्चय को तोड़  सका।  ही भारतीय जनता में अंग्रेज साम्राज्यवादियों के खिलाफ दहकती नफरत एवम् आक्रोश  को दहशत के सन्नाटे में दफना सका। इसके विपरीतसाम्राज्यवादी शासकों के दरिन्दगी भरे अत्याचारों ने भारतीय लोगों में साम्राज्यवाद के विरुद्ध नफरत की आग को और ज्यादा आक्रोशित करने तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान एवम् देशभक्ति को प्रचन्ड करने में भूमिका निभाई। गदरी योद्धायों की शहादतें भारत की राष्ट्रीय मुक्ति लहर के ऐतिहास में असली राष्ट्रीय आजादी की क्रांतिकारी प्रबल इच्छाइस आदर्श में दहकती भरोसे की भावनासंग्रामी सुदृढ़ता और खुद को न्यौछावर करने की भावना ऐसा रौशन-मीनार बन गईंजिसने आगामी तथा ऊँचे पड़ाव में दाखिल होने जा रहे क्रांतिकारी राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष का मार्ग-दर्शन किया तथा इसे ऊपर उठाने में अपनी भूमिका निभाई।
इसलिए गदर पार्टी और गदर लहर हमारी शानदार क्रांतिकारी विरासत का एक गौरवमयी अध्याय है। यह आज भी प्रासंगिक है। यह आज भी देश को साम्राज्यवादी-सामंतवादी गठजोड़ से मुक्त करवाने तथा राष्ट्रीय जनवादी क्रांति के लिए जूझ रही और सिर-धड़ की बाजी लगाने चलीं क्रांतिकारी-जनवादी राष्ट्रवादी और देशभक्त शक्तियों के लिए मार्गदर्शक है। आज भी देश साम्राज्यवादियों की नव-बस्तीवादी अधीनता में जकड़ा हुआ हैसाम्राज्यवादी दलालोंजागरीदारोंबड़े साहूकारोंपरजीवी अवसरवादी सियासतदानों और नौकरशाहों की हमलावर लूटउत्पीडऩ तथा धौंस का शिकार है। आज भी इस जन-दुश्मन मंडली द्वारा की जा रही लूट और उत्पीडऩ के खिलाफ उठते जन-संघर्षों को खून में डुबो देने के लिए गोली सिक्के का बेरहम इस्तेमाल हो रहा है। ऑपरेशन ग्रीन-हन्ट के नाम पर लोगों पर फौैजी हमला आरम्भ किया हुआ है। समप्रदायिकता को हवा दे कर लोगों को परस्पर कत्लेआमों में झोंकने की कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही। प्रतिक्रियावादी साम्राज्यवादी-सामंती पतनशील संस्कृतिप्रगति-विरोधी पैतृक सामाजिक मुल्यों का बोलबाला है।
ऐसी हालत में गदर पार्टी द्वारा उस ऐतिहासिक दौर में सभी सीमितताओं के बावजूद उभारे गए राजनीतिक उद्देश्योंधर्म निरपेक्षताजात-पात विरोधी तथा औरत-मर्द बराबरता की बुलंद की गईं नीतियां हमें राह दिखलाती हैं। आज भी अंग्रेज शासकों के नादरशाही अत्याचारों तथा जुल्मों के समक्ष उनकी अडिगनिरन्तरप्रयत्नशीलता और उमड़ती राष्ट्रीयता तथा देशभक्ति की भावना संघर्षशील क्रांतिकारियों का प्रेरणा-श्रोत बनते हैं।
आओआज अब भारतीय शासकों तथा शासक प्रस्त हिस्सों द्वारा एक तरफ नकली आजादी का ढोल पीटा जा रहा हैलोगों को धोखा देने का खेल खेला जा रहा है और दूसरी तरफ गदर लहर की संग्रामी विरासत का हुलिया विगाड़ कर इसका अपहरण करने की कोशिश हो रही है। इसलिए इन धोखेबाजों से स्पष्ट अन्तर की रेखा खींचते हुएआओगदर लहर की इस संग्रामी विरासत का झंडा लहराएँ और राष्ट्रीय जनवादी क्रांति के मार्ग पर अपनी सुदृढ़ता और अविचल पेशकदमी द्वारा इसे आगे बढ़ाने का प्रण करें।
(सुर्ख रेखासितंबर-अक्तूबर, 2013)










गदर लहर में महिलाओं की शानदार भूमिका
-मनदीप
बीसवीं शताब्दी के समय के पहले दशक में भारत की अंग्रेज बस्तीवादियों के हाथों लूट अपनी चरम-सीमा पर थी। भारत की पूँजी आनाजकपासवेतन तथा अन्य सामग्रियों के रूप में तेजी से इंगलैंड  भेजे जा रहे थे। प्रत्येक वर्ष औसतन 17 करोड़ 50 लाख पौंड की रकम भारत से विदेश जाती थी तथा इस रकम में हर वर्ष बढौतरी हो रही थी। भारतीय मेहनतकश जनता की दशा गरीबीभूखमरीआकालबिमारियों से जर्जर हो चुकी थी।
अंग्रेजी साम्राज्य की इस निर्दयी लूट तथा शोषण की चक्की में पिस रही भारतीय मेहनतकश जनता के आधे भागमहिलाओं की हालत और भी बदतर थी। वे  केवल भारतीय जनता पर जुल्म कर रहे अंग्रेज साम्राजवादियों की आर्थिकसामाजिकसांस्कृतिक शोषण का शिकार थींबल्कि भारतीय समाज में सदियों से जड़ें जमाए बैठे सामंती भेद-भाव का शिकार भी थीं। घर से बाहर जानेखाने-पीनेअच्छे कपड़े पहनने तक की पाबंदियाँ थीं। लड़की को जन्म लेते ही मार डालने की रीतबाल-विवाहसती-प्रथादहेज-प्रथापर्दा-प्रथा का भारतीय समाज में प्रचलन आम बात ती। साम्प्रदायों तथा जातियों में टुकड़े-टुकड़े हुए भारतीय समाज के सभी हिस्सों में महिलाओं का दर्जा पाँव की जूती के समान था। इससे भी बढ़कर आबादी का ये आधा भाग पतियोंभाइयोंबेटोंजमाइयों का संताप भी सीने में लिए हुए था। सीने का दर्द शब्दों में निकलता, 'बसरे दी लाम टुट्टजेनी मैं रंडीयों सुहागण होवांÓ (अर्थात् इराक के शहर बसरे का युद्ध अगर समाप्त हो जाए तो मैं विधवा से सुहागन बन जाऊँ) साम्राज्यवादी तथा सामंती शोषण वाले प्रबंध से मुक्ति की अत्यंत आवश्यकता इस हिस्से को थी।
ऐसे समय अमरीका कैनेडा जा पहुँचे भारतियों के एक जागृत हिस्से ने साम्राज्यवादी अंग्रेजों को देश से बाहर निकाल कर आजादीबराबरी तथा भाईचारे पर आधारितदेश के निर्माण के लिए गदर का आह्वान दिया। इन देशों में मुकाबलतन सुख्य सुविधाओं भरी जिन्दगी को ठोकर मारकर सैंकड़ों माताओं के बेटे गदर पार्टी के ध्वज तले गावत को संगठित करने के लिए सिपाही बनने चल पड़े। सभाओंतकरीरोंजलसों के साथ-साथ 'गदरÓ अखबार के माध्यम से पार्टी ने हथियारबद्ध क्रांति का आह्वान दिया। गदरियों के प्रचार ने दूर-दूर तक देशों तथा टापुओं में बसे हुए भारतियों में वतन की मुक्ति की मशाल प्रज्वलित कर दी। गदर पार्टी ने अंग्रेजी शासन के साथ साथ इसके देसी चमचोंनवाबों-राजाओं-राय बहादुरों को जन-दुश्मन करार देते हुए देश के लोगों तथा भारतीय सैनिकों को हथियारबद्ध विद्रोह करने के लिए उठ खड़े होने का आह्वान दिया। जात-पातसम्प्रदायोंधर्मों की संकीर्ण-सोच को त्यागकर समानता तथा भाईचारे वाली खरी आजादी के लिए पाँच प्यारों के वारिसों से सिरों की माँग की। गदर पार्टी के प्रचार तथा काम ने सैंकड़ों आजादी के परवानों को साम्राज्यवादी जंजीरों से आजादी के लिए जंग के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित कियापरन्तु इसके साथ ही इसका एक महत्वपूर्ण पक्ष महिलाओं की भूमिका संबंधी इसका दृष्टिकोण है। भारत के इतिहास में पहली बार गदर लहर ने महिलाओं की आजादी तथा समानता का आह्वान दिया।
उस समय के भारत में जब जन्म लेते ही लड़की को गला दबा कर मार डालना समाज में आम रूप में प्रचलित था। लड़कियों का घरों से बाहर निकलकर विद्या तथा सम्मानजनक रोजगार प्राप्त करना आश्चर्यजनक बाते थीं। सभी सामाजिक लहरें मर्दों की लहरें थीं। उस समय गदर पार्टी द्वारा अपने लेखों तथा प्रचार में महिलाओं की आजादी तथा समानता की बात उभारना और भी महत्व रखता है। बराबरी तथा आजादी के विशाल संकल्प के महिला वर्ग के लिए अर्थों को समझना तथा इसे अपने प्रचार का हिस्सा बनानागदर पार्टी की समझ तथा अपनाई गई दिशा का प्रमाण है। गदर पार्टी द्वारा प्रकाशित पुस्तिका 'गुलामी का जहरमें धार्मिक ग्रन्थोंपारंपरिक शिक्षा प्रबंध तथा तमाम गुरूओं-उपदेशकों द्वारा औरत को पति की रजा में रहने वाली तथा भोगी जाने वाली वस्तु के रूप में पेश करने का जोरदार विरोध किया गया है। औरत गुलामी के इस प्रबंध के परिणामस्वरूप औरतों के मानसिक विकास के अपाहिज हो जाने की बात कही है। मर्द गुलामी भोग रही औरत के मानव जाति की सेवा तथा विकास जैसे आदर्शों से वंचित होने तथा उसकी 'आत्मा तथा बुद्धिके विनाश की बात कही गई है। आबादी के इस आधे भाग के पैरों में पड़ी बेडिय़ों के कारण मानव जाति की उन्नति में ठहराव  जाने की बात की गई है।
गदर पार्टी ने औरतों के प्रति अपनी समझ को अभ्यास में ढाला। पहली संसार जंग छिडऩे के पश्चात् जब महात्मा गांधी भारत की औरतों को उपदेश दे रहे थे कि ''यदि तुम सब चाहती हो कि वो सच्चे मनुष्य बनें तो उन्हें (अपने बेटों कोअपना आशीर्वाद देकर सेना में भेजो", उस समय गदर पार्टी भारतीय महिलाओं को आजादी की जंग में कूद पडऩे का आह्वान दे रही थी। भारतीय औरतों को साम्राज्य विरोधी जंग में शामिल करने के लिए 'गदरपत्रिका में अक्सर अन्य देशों की वीरांगनाओं की कहानियां छापी जाती थीं। गदर पार्टी ने एक पुस्तिका छापी, ''रूसी लड़कियां किस प्रकार देश की सेवा करती हैंजिसमें देश भक्त रूसी लड़कियों के कारनामेे तथा जीवनियां दी गई थीं। 30 अगस्त 1916 में न्यूयार्क ट्राम तथा रेलवे मजदूरों की हड़ताल दौरान मजदूर औरतों द्वारा न्यूयार्क के होटलों के सामने किये गए विरोध प्रदर्शन की $खबर को प्रमुखता से उभारा गया। यूरोपीय देशों में भिन्न-भिन्न समय पर महिलाओं द्वारा हथियारबद्ध होकर युद्धों में जाने के अनेकों उदाहरण प्रेरक प्रसंगों के रूप में छापे जाते थे।
गदर लहर के सु$र्ख सफर में अनेकों वीरांगनों के पद-चिह्न अंकित हैं। गदर पत्रिका का वितरणपार्टी साहित्य को विदेशी धरती से देश में भेजने के प्रबन्ध करनागदरियों के लिए ठिकानों का प्रबन्ध करने तथा उन्हें पुलिस से छुपानेरिश्तेदार बनकर घर दिलवाने तता संदेशों का आदान-प्रदान करने में विभिन्न महिला संघर्षकर्मियों की भूमिका रही है। इनमें से गुलाब कौर का नाम प्रमुख है। जब 1914 में बड़े स्तर पर गदरी वतन को छोड़कर  गए तो मनीला से गुलाब कौर भी गदरियों के का$िफले में शामिल हो गई। गुलाब कौर के मन में गदर पार्टी के सम्पर्क से देशभक्ति की ऐसी चिंगारी सुलगी कि  उसे पति मान सिंह रोक सका तथाकाथि लोक-लाज उसका रास्ता रोक सकी तथा  ही गदरी जिन्दगी की मुशिकलें उसे कमजोर कर सकीं। सभी गदरियों की इस बहन ने हांगकांग गुरूद्वारे की भरी सभा में अपनी चूडिय़ां उतारकर मर्दों में फेंक दीं तथा चुनौती दी कि यदि कोई मर्द जंग--आजादी में भाग नहीं ले सकता तो वे चूडिय़ाँ पहन ले। ऐसे मर्दों के स्थान पर हम औरतें लड़ेंगी। गदर पार्टी अंतिम स्वासों तक उसका सभी कुछ बनी रही। गुप्त ठिकानों की सुरक्षा करनासंदेशों को पहुँचानापार्टी कार्यों के लिए नए घर किराए पर लेने के लिए पति-पत्नी का स्वांग  करना तथा गदरियों की बिना थके सेवा करने में उसने अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया। कई गाँवों में वो औरतों की मीटिंगें भी करवाती। गदर के गीत गाती। गदर लहर में भाग लेने के कारण उसे दो साल के लिए जेल भी जाना पड़ाजहाँ उसे कई प्रकार की यातनाएँ दी गईंपरन्तु गदर का यह सुर्ख गुलाब सदैव अडिग रहा।
गुलाब कौर के अतिरिक्त बहन सत्यावती ने गदरी देशभक्तों को किराए पर घर दिलाने के लिए कई बार पत्नी की भूमिका निभाई। मई 1914 में जब मौलवी बरकतुत्ला जापान छोड़कर सानफ्रांसिस्को गदर आश्रम  गया तो जापान में गदर पत्रिका तथा पार्टी के अन्य साहित्य के वितरण का कार्य श्रीमती फ्लोरैंस मजूमदार ने संभाल लिया। फ्रांस में मैडम भीखम जी कामा ने गदर पत्रिका के वितरण कार्य में अपना योगदान दिया। गदर लहर में विदेशी महिलाओं का योगदान भी अमुल्य रहा है। एक रूसी लड़की मिस रौजिकूहर पार्टी का साहित्य बाँटतीबाहरी खुफिया अड्डों पर पहुँचातीजहाजों में देकर आती तथा सभी जगह इसे सुरक्षित रूप में पहुँचाने का प्रबन्ध करती। पार्टी के सहायकों में अमरीकन महिलाएँ मैरी लिरओन हाऊजरकैरिंगटन लिऊस तथा फरैड़ा बर्च के अतिरिक्त सोशलिस्ट नेता ऐमा गेल्डमैन भी शामिल थी। एक और अमरीकी महिला ऐगनीज स्मैडली को गदरियों को शरण देने के जुर्म में ग्रिफ्तार किया गया। उसने 'भारत की आजादी के दोस्तनाम की संस्था बनाई तथा ग्रिफ्तार गदरियों तथा अन्य कैदियों को अमरीका से भारत भेजने के विरुद्ध अभियान संगठित किया। वो लगातार गदर पार्टी के संपर्क में रही।
100 वर्ष बीत जाने के बाद भी गदर पार्टी का आजादी तथा समानता की बुनियादों पर राष्ट्रीय लोकतंत्र कायम करने का सपना अधूरा है। इस सपने को साकार करने के लिए जन-संघर्षों में महिलाओं की सक्रिया रूप में भागीदारी वर्तमान समय की जरूरत है। खरे जन-लोकतंत्र के निर्माण के मार्ग ने ही महिलाओं की आजादी तथा समानता की मंजि तक पहुँचना है।
(सुर्ख रेखासितम्बर-अक्तूबर, 2013)


किसान तथा खेत-मजदूर संगठनों द्वारा
संयुक्त गदर शताब्दी अभियान
-लछमन सिंह सेवेवाला
वर्ष 2013 गदर पार्टी की स्थापन शताब्दी वर्ष है। इस वर्ष दौरान पंजाब की भिन्न-भिन्न सामाजिकराजनीतिक तथा अर्ध-राजनीतक संगठनों तथा भारी/बड़ी गिनती में जनहित संगठनों ने अपनी-अपनी समझसामथ्र्य तथा शैली अनुसार इस गदर शताब्दी अभियान में अपना योगदान देते हुए देशभक्त गदरी योद्धायों को श्रद्धा-पुष्प अर्पित किए हैं। इस प्रसंग मेंभारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहांतथा पंजाब खेत-मजदूर यूनियन ने सांझा गदर शताब्दी अभियान चलाने का निर्णय लिया। इस अभियान के उद्देश्यों तथा तथ्य संबंधी संयुक्त विचार यह बना कि गदर लहर हमारे देश की राष्ट्रीय-स्वतंत्रता लहर का बहुत ही महत्वपुर्ण भाग है तथा बहुत ही गौरवशाली विरासत है। परन्तु दु: की बाद यह है कि हमारी जनता मेंविशेष रूप से किसान तथा खेत-मजदूरों में इस लहर संबंधी जानकारी बहुत नाममात्र तथा नाकाफी है। इसलिए इस संयुक्त अभियान का प्रथम उद्देश्य किसान तथा खेत-मजदूर जनता कोविशेषकर इसके सरगर्म भागों में कार्यकर्ताओं को यथयोग्य जानकारी हासिल करवाना होना चाहिए। दूसरी बात यह कि जिन सामाजिकराजनीतिक तथा आर्थिक हालातों में से गदर लहर का जन्म हूआ थावे हालात तथा उनमें से निकलने वाली समस्याएँ तथा कार्य लगभग वैसे ही खड़े हैं। बल्कि अनेकों पक्षों से हालात और भी गंभीर हो गए है। इसलिए इस संयुक्त अभियान का दूसरा उद्देश्य वर्तमान हालातों में किसान लहर के प्रेरणा-स्रोत के रूप में गदर लहर की प्रासंगिकता को उभारना होना चाहिए। तीसरी बात यह कि इस शताब्दी आंदोलन की चरम सीमा पर 1 नवंबर को देशभगत यादगार कमेटी के नेतृत्व में देशभक्त यादगार हॉल में विभिन्न संगठनों पर आधारित विशाल एकत्रता हो रही है। इसलिए इस संयुक्त अभियान का तीसरा उद्देश्य इन दो संगठनों के नेतृत्व अधीन अधिक से अधिक किसान तथा खेत मजदूर जनता को गतिमान करके इस एकत्रता में शामिल करवाना होना चाहिएजिससे वे यथा संभव अपनी अमीर तथा गौरवमयी विरासत से जुड़ सके तथा इससे प्रेरणा और उत्साह प्राप्त कर सके।
भिन्न-भिन्न जिलों में ब्लॉक स्तरीय सम्मेलनों से इस अभियान को संगठनात्मक रूप दिया गया। इस प्रकार के कुल 24 सम्मेलन किए गएजिनमें कृषि-व्यवसाय की कड़ी व्यस्तता के हालातों में भी 6000 से भी अधिक इन संगठनों के कारकुनों तथा सरगरम सदस्यों/कार्यकर्ताओं ने भाग लियाजिनमें सैंकड़ों की गिनती में महिलाएँ भी शामिल हुईं।
इस अभियान का आगाज (शुभारंभमहान गदरी वीराँगना बीबी गुलाब कौर की जन्मभूमि बखशीवाला (•िाला संगरूरसे किया गया। इस सम्मेलन में बीबी गूलाब कौर तथा गदर लहर से संबंधित नाटक तथा इन्कलाबी संगीत भी पेश किया गया। (अन्य सम्मेलनों में ऐसे सांस्कृतिक समागम करने से सोच-समझकर परहेज रखा गयाताकि सम्मेलनों का अधिक से अधिक समय गदरी लहर तथा वर्तमान काल में इसकी प्रासंगिकता को उभारने के लिए प्रयोग में लाया जा सके।इस सम्मेलन में भले ही गदर लहर संबंधी जानकारी देने तथा इसकी प्रासंगिकता के विषयों को भी संभव हद तक उभारा गयापरन्तु इसमें गदरी बीबी गुलाब कौर के जीवन-संघर्षकुर्बानी एवं महनता को उभारने को भी प्रमुखता दी गई। इस बात को जोरदार रूप में उभारा गया कि आज से 100 वर्ष पूर्व की जागीरदारी सामाजिक परिस्थितियों में भी किस प्रकार एक महिला द्वाराजो गरीब किसान परिवार से थीअपना जीवन इन्कलाबी सियासत को समर्पित कर दिया गया।
उसके द्वारा कड़े जागीरदारी पारिवारिक बंधनों को तोड़कर सामूहिक तथा राष्ट्रीय हितों को पारिवारिक रिश्तों से ऊपर समझकार चल पडऩा तथा जिन्दगी भर अद्वितीय विश्वास तथा दृढ़ता के साथ निर्वाह करनाकेवल निर्वाह ही नहीं करना अपितु अंग्रेजी प्रशासन के अत्याचार तथा प्रशिक्षण के सख्त हालातों में भी पुलिस की पैनी नजरों से बचकर महिलाओं में क्रांतिकारी प्रचार करनाइसके अतिरिक्त क्रांतिकारी संदेशसाहित्य तथा हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने जैसे जो$िखम भरे कामों में भी सफल क्रांतिकारियों की भांति पूरे उतरना वास्तव में महान हैये सब उसको माई भागोदुर्गा भाभी तथा लक्ष्मी सहगल जैसी वीरांगनों के स्तर में खड़े कर देता है। इस सबकी संक्षेप चर्चा करते हुए महिलाओं को इन वीरांगनों से प्रेरणा लेने तथा विरासत को अपनाने का अह्वान दिया गया। वैसे भीवर्तमान हालातों में मेहनती जनता की लहर में तथा विशेष रूप में किसान लहर में महिलाओं की भागीदारी तथा भूमिका के आम महत्व को जोरदार रूप में उभारा गया।
गदर लहर तथा इसके उद्देश्यों के बारे में जानकारी देने संबंधी इन सम्मेलनों में श्रोताओं को गदर क्रांतिकारियों की वर्गीय पृष्ठभूमि के बारे मेंउनके आदर्शो तथा बलिदानों के बारे में तथा इन सबसे बढ़कर महान विश्वास (आश्थातथा दृढ़ता के साथ जीवन-समर्पण के क्रांतिकारी चरित्र संबंधी जागृत किया गयाजिसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
-वर्गीय पृष्ठभूमि देखें तो गदरी क्रांतिकारी कंगाल तथा खोखले हो चुके छोटे किसान थेजिनकी जमीने छिन रहीं थींकर् हद से जयादा बढ़ रहे थेकरजों के भुगतान करने मुश्किल हो रहे थे तथा जिन्हें निरन्तर आकालहैजे तथा पलेग जैसी महामारियों की मार झेलनी पड़ती थी। जब वे मजबूरन अंग्रेजी फौज में भर्ती हुए अथवा रोजगार की खोज में विदेश गए तब भी उन्हें सुख-चैन की खुशहाल •जन्दगी नसीब  हुई। फौज में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि भारतीय सिपाहियों को 9 रुपए परन्तु गोरों को 45, भारतीय सिपाहीयों को खराब वर्दी तथा भोजन लेकिन गोरों को अच्छीइससे भी बढ़कर युद्ध के समय भारतीय फौज आगे और गोरे पीछे। जब वे फौज छोड़कर अथवा सीधे ही कैनेडाअमरीका गए तो वहां भी नस्ली भेदभाव ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। गोरों के मुकाबले कम वेतनछिट-पुट रोजगार तथा उसपर नस्ली हमले। यहां पर भी उन्हें चैन नसीब नहीं हुआ। इससे बढ़कर फौजी नौकरी के समय भीविदेशी-मजदूरी के समय भी कुलीकालेगुलाम तथा तेतीस करोड़ भेड़ों जैसे नस्ली ताने उन्हें लगातार जलील करते रहे। दूसरी तरफ उन्होंने स्वतंत्र देशों को विकास करते देखा तथा वहां के लोगों की आसान जीवन परिस्थितियां देखीं। उनकी आंखें खुल गईं। उन्हें गुलामी तथा आजादी का अंतर साफ दिखने लगा। उनमें राष्ट्रीय जागृति पैदा हुई तथा देश को आजाद करवाने की तीव्र इच्छा बल पकडऩे लगी। परिणामस्वरूप वे एक सच्चे राष्ट्रवादी क्रांतिकारी राजनीतिक शक्ति में बट गए।
-इस नवीन जागृति से तथा नई भुमिका में उनके लिए जंगे-आजादी सबसे मुख्य आवश्यकता बन गई। क्योंकि उन्हें अपने तथा देश के सारे संकट तथा कष्टों का कारण गुलामी लगती थी और इन सभी दुखों का निवारण आजादी से होता लगता था। इसलिए उन्होंने स्वतंत्रता की वेदी पर सबकुछ अर्पित करने की ठान ली। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए उन्होंने अपने समक्ष धर्मों/जातियों/क्षेत्रीय रूप में विभाजित राष्ट्र कोइन आपसी विभाजनों से ऊपर उठाकर एक राष्ट्र के रूप में संगठित करने तथा इस संगठित शक्ति के बल पर हथियारबद्ध संघर्ष द्वारा अंग्रेजी शासन को उखाड़ फैकने का लक्ष्य रखा। इस शासन के स्थान पर उन्होंने राजाशाही से मुक्त तथा धर्म-निरपेक्ष अमरीकन रिपब्लिक जैसा लोक-राज स्थापित करने का उद्देश्य रखाजिसमें भाईचारा होबराबरी होकिसान-मजदूर का राज होअकाल तथा पलेग से मुक्ति मिलेविद्या तथा स्वास्थ्य-सुविधाओं की गारंटी हो तथा देश वैज्ञानिक विकास के मार्ग पर चले।
-इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उन्होंने 1913 को गदर-पार्टी की स्थापना कीगदर $खबार छापा तथा बड़े क्रांतिकारी परिश्रमों तथा उत्साहपूर्ण प्रयत्नों के बल पर एक-दो वर्षों में ही भारतअमरीकाकैनेडा समेत लगभग 50 देशों के टापूओं में जंग--आजादी का जोरदार प्रचार किया। इन सब स्थानों पर पार्टी कमेटियां स्थापित कीं। यही सबकुछ इनके इन देशों तथा टापुओं में अंग्रेजी शासन अधीन भारतीय फौजों की छावनियों में भी किया तथा समय आने पर गदर करने के लिए जंगी तैयारियाँ कीं।
-जब विश्व युद्ध आरंभ हुआ तो उन्हें यह गदर करने का सही समय महसूस हुआ। अतगदर के लिए वतन की ओर कूच करने का आह्वान दिया गयाहजारों की गिनती में (लगभग 8000) जांबाज योद्धे इन देशों तथा टापुओं में अपनी धन-सम्पत्ति  रोजगारों को ठोकर मारकरसिर पर कफन बाँधकर वतन की ओर उमड़ पड़े। अनेकों गदरी रास्ते में पकड़े गएबाकी छावनियों तथा गावों में गदर की तैयारियों के दौरान भीतर मौजूद जासूसों तथा जागीरदारों और चुगलखोरों की करतूतों के कारण पकड़े गए। बड़े मुकद्दमें चलेबड़ी सजाएँ हुईंबड़ी यातनाए मिलीं, 145 योद्धाओं को फांसी मिली सीधे ही गोली मार दी गई, 306 को उम्र कैद तथा काले पानी की सजाएँ तथा 77 को छोटी सजाएँ हुईं। इसके अतिरक्ति सैंकड़ों को ग्रामीण सीमाबन्दी कर दी गई तथा अनेक लोगों के घरों की निलामी हो गई। कैद तथा सजाएँ काटकर आने के पश्चात् भी अंतिम समय तक किसी ना किसी रूप में पुनसंगठित होकर न्यायसंगत-जन-संघर्षों विशेषकर पट्टेधारी लहर तथा कर्जा मुक्ति लहर जैसे किसान संघर्षों में सक्रियता के साथ जूझते रहे तथा इन संघर्षों को जुझारू रूप प्रदान करते रहे।
जहाँ तक आज के हालातों में गदर लहर की प्रासंगिकता का सवाल हैइस सम्मेलनों के दौरान यह बात जोरदार रूप में उभारी गई कि जिन सामाजिक राजनैतिक तथा आर्थिक हालातों में से गदर लहर पैदा हुई थीआज 100 वर्ष बीत जाने के बाद भी इनमें कोई बुनियादी परिर्वतन नहीं हुएइसलिए लहर के उद्देश्यों तथा नीति निर्धारण के बहुत सारे पक्षों में गदर लहर आज भी हमारा मार्ग-दर्शन करती है तथा प्रेरणा स्रोत बनती है। सम्मेलनों के दौरान उभारे गए महत्वपूर्ण पक्ष इस प्रकार हैं:
पहली बातगदरी क्रांतिकारियों का सबसे बड़ा उद्देश्य यह था कि देश साम्राज्यवादी जंजीरों से आजाद होपरन्तु उनका यह सपना पूरा नहीं हुआ। बेशकहमारे देश पर अब किसी एक साम्राज्यवादी शक्ति का सीधा कब्जा नहीं हैपरन्तु अप्रत्यक्ष रूप में आज कितनी ही साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा हमारे देश के माल-खजानों तथा श्रम-शक्ति की लूट उस समय से भी कहीं बड़ी है। आज अमरीकन महाशक्ति के अतिरिक्त कई और साम्राज्यवादी शक्तियाँ भी हमारी सामाजिक-राजनीतिकआर्थिक तथा सांस्कृतिक •िान्दगी के सभी क्षेत्रों पर कब्जा किए बैठी हैं। अतहमारे देश को इस साम्राज्वादी कब् से मुक्त करवाने का कार्य आज गदर लहर के वारिसों के लिए महत्वपूर्ण कार्य के रूप में मौजूद रह गया है।
दूसरी बातगदरी क्रांतिकारियों का दूसरा बड़ा उद्देश्य देश को साम्राज्यवादी जंजीरों से आजाद करवाकर ऐसे लोकतांत्रिक राज की स्थापना करने का थाजिसमें किसानों पर  ''टैक्स लगानका ''बोझ कमहोदेश में ''खुशहालीहो, ''अकाल पलेगसे मुक्ति मिले तथा जहाँ पर मजदूर-किसान का राज हो। परन्तु आज देश की स्थिति पहले से भी गंभीर है। देश कृषि-अर्थचारे के भीषण संकट का शिकार है। कृषि मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर हैजो कि कभी सुखे तथा कभी डूबने का शिकार होती रहती है। अत्याधिक बेरोजगारी हैरोजगार के परिवर्तित प्रबन्ध नहीं हैं। मजबूर तथा मायूस (निराशकिसान आत्महत्याएँ कर रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि जब तक भूमि का अन्यायपूर्ण तथा असामान वितरण समाप्त करके जागाीरदारी तथा सूदखोरी का पूर्ण रूप से अन्त नहीं होता तथा गरीब किसानों तथा खेत-मजदूरों की भूमि की कमी को पूरा नहीं किया जातातब तक  किसान तथा खेत-मजदूर चैन की •िान्दगी जी सकते हैं बेपनाह बेरोजगारी का अन्त हो सकता है तथा  ही देश वास्तविक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। परन्तु देश में जो हो रहा हैउसकी दिशा एकदम विपरीत है। देश में बदल बदलकर आते रंग-बिरंगे शासकों द्वारा साम्राज्यवादी निर्देशों के अधीन जो तथाकथित नई आर्थिक नीतियां हमारे देश पर थोपी जा रही हैंवे हमारे देश पर साम्राज्यवादी लूट तथा जकड़ को ही मजबूत नहीं करतीं अपितुबड़े उद्योगिक घरानों को बड़े मुनाफे देकर और शक्तिशाली बनाती हैं तथा इसके मुकाबले में छोटे उद्योगों को बर्बाद करके बेरोजगारी को बढ़ावा देती हैं। खेतीबाड़ी सैक्टर में ये नीतियां जागीरदारों तथा सुदखोरों को बड़ी सबसिडियां तथा सुविधाओं के मोटे मुनाफे देकर उनकी स्थिति मजबूत करती हैं तथा उनके द्वारा किसानों की लूट को और तीखा  तीव्र करती हैं। इससे भी बढ़करजमीनी सुधारों को उल्टा घुमाकरसीमाबन्दी कानून को समाप्त करके ये नीतियां 40 प्रतिशत किसानों के पुनरोजगार का प्रबन्ध किए बिना कृषि धंधे से बाहर धकेलने तथा उद्योगिक कृषि प्रणाली लागू करने की ओर अग्रसर हो रही हैं। तथाकथित हरितक्रांति के नाम पर खेत-मजदूरों के रोजगार का बड़े स्तर पर बेड़ा-गर्क कर दिया गया था तथा बची खुची कसर अब हरितक्रांति के अगले दौर के माध्यम से निकाली जा रही है। अतदेश के अत्यंत गंभीर कृषि संकट को किसान-पक्षीयलोक-पक्षीय तथा देश के वास्तविक विकास की दृष्टि से हल करने का बड़ा कार्य गदर लहर के वारिसों के समक्ष खड़ा है।
तीसरी बात:  गदरी क्रांतिकारियों ने देश से साम्राज्यवादी जकड़ (कब्के अंत के लिए तथा देश में भाईचारे की समानता तथा सामाजिक समानता वाले आजाद लोकतांत्रिकधर्म-निरपेक्ष तथा मजदूर किसान के राज को स्थापित करने के लिए धर्मोंजातियोंक्षेत्रों के आधार पर बाँटे गए राष्ट्र को इन छोटे बटवारों से ऊपर उठाकर एक राष्ट्र के रूप में तथा एक शक्तिशाली जन-शक्ति के रूप में संगठित करने की सही नीति अपनाई थीजिसके अनुसार धर्म को किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला माना गयाउनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की पहुँच को अपनाया गया तथा एक हद तक भिन्न-भिन्न धर्मों की जुझारू विरासत को साम्राज्यवाद विरोधी जंग में प्रयोग में भी लाया गया। परन्तु लोगों में धर्मोंजातियोंक्षेत्रों के आधार पर पैदा होने वाली साम्प्रदायिकताजातिवाद तथा क्षेत्रीयवाद की भावना को जड़ से निकालकर फेंका गया। नि:संदेह गदरी क्रांतिकारियों ने इस सही पहुँच को अपने संगठन में 100 प्रतिशत सफलता से लागू भी किया।
परन्तु आज हमारे देश में इस दृष्टि से स्थिति बहुत ही गंभीर है। विभिन्न धर्मों के ठेकेदार साम्राज्यवादियों तथा भारत के प्रतिक्रियावादी वर्गों के सेवादारों की भूमिका निभा रहे हैं। जन लहरों को विभाजित करनेबिखेरने तथा कमजोर करने के लिए जनता की धार्मिक भावनाओं का दुरूपयोग करते हैं। सभी शासक वर्गीय पार्टियां इस भ्रष्ट खेल में शामिल हैं। वे समय-समय पर धर्मजाति तथा क्षेत्रीय मुद्दों का लोगों को आपस में लड़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इस संकीर्ण विभाजन को वे चुनाव में मुद्दे उछालकर प्रयोग में लाते हैं। इस प्रकार वे लोगों में दरारों को बढ़ाते हैं तथा पक्की करते हैं। ऐसी स्थिति में देश के लोगों मेंविशेष तौर पर उनके संगठनों तथा संघर्षों में साम्प्रदायकजातीवाद तथा क्षेत्रीय दरारों को दूर करते हुए साम्राज्यवाद विरोधी राष्ट्रीय एकता का निर्माण करना गदर लहर के वारिसों के समक्ष एक बड़े कार्य के रूप में खड़ा है।
चौथी बात:  गदरी क्रांतिकारियों द्वारा उभारे गए महान आदर्श/उद्देश्य तथा इनके लिए किए जाने वाले महान कार्य समाज तथा शासन प्रणाली में बड़े आधारभूत परिवर्तनों की मांग करते हैं। इनका मुकाबला  केवल जागीरदारोंसूदखोरोंबड़े उद्योगपतियों तथा इनके भारी भरकम शासन प्रबन्ध से होगाबल्कि इनकी स्वामी साम्राज्यवादी शक्तियों से भी होगा। इसलिए गदर लहर के सच्चे अनुयायियों को राष्ट्र तथा मेहनतकश लोगों की विशालतम एकता तथा गतिमानता के प्रयास की जरूरत होगी। इसके लिए सिर पर $फन बाँधकर लडऩे की मानसिक तैयारी की जरूरत होगी। इस दृष्टि से जिस बेमिसाल बहादुरीशूरबीरता तथा जुझारता से गदरी क्रांतिकारियों ने संग्राम कियाजिस महान आस्थादृढ़ता और कुर्बानी की भावना से उन्होंने संघर्ष के मैदान में डटे रहने की मिसाल पेश कीइससे उनके सच्चे वारिसों को अतयंत प्रेरणा मिलती है। ये महान क्रांतिकारी काया तथा चरित्र सामने खड़ी घमासान लड़ाइयों में डटे रहने के लिए आवश्यक है। गदरी क्रांतिकारी लहर तथा गदरी क्रांतिकारी शूरवीरों के बारे में और गदर लहर की मौजूदा प्रासंगिकता के बारे में उपरोक्त जानकारी से लैस होकरइन दोनों संगठनों के क्रियाशील कार्यकर्ता तथा नेता विभिन्न क्षेत्रों तथा गांवों में पहुँचे। उन्होंने अपने-अपने संगठनों की विशेष जरूरतों के अनुसार किसानों तथा खेत-मजदूरों की एकता और नौजवानों  औरतों को उभारने को विशेष महत्व दिया। किसान तथा खेत मजदूर जनता को गदरी क्रांतिकारियों के आदर्शोंकारनामों तथा कुर्बानियों के संंबंध में पूर्णतजानकारी दी। उनको 1 नवम्बर को देशभगत यादगार हॉल में होने वाले समागम में पहुँचने के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप दोनों संगठनों के नेतृत्व में हजारों किसान तथा खेत-मजदूरपरुष  महिलाएँ समागम में शामिल हुए। उन्हें गदरी क्रांतिकारी लहर की विरासत से तथा इसके महत्व से परिचित होने तथा प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर मिला। (सुर्ख रेखानवम्बर-दिसम्बर, 2013)
नए इन्कलाबी युद्ध के आह्वान के साथ
गदर-शताब्दी अभियान सम्पन्न
गदर शताब्दी अभियान के संदर्भ में चिंतकों द्वारा गदर पार्टी के इतिहास के महत्वपूर्ण पक्ष विश्लेषणात्मक दृष्टि से सामने लाए गए हैं। पंजाब के विशविद्यालियोंकॉलेजोंविद्यालयों से लेकर गाँवों तक चले अभियान का केन्द्र गाँव बने।
गाँव में भूमिहीन मजदूरोंकिसानोंनौजवानों तथा औरतों ने इस अभियान में  विशेष रूप में भाग लिया। बिजली कर्मचारियों के संगठन द्वारा बाकायदा इस अभियान में भाग लेना एक आशायुक्त सकारात्मक पक्ष है।
इन वर्गों में सक्रिया संगठनों ने अपने प्रयत्नों द्वारा विशेष रूप से गदर पार्टी के इतिहास तथा अन्य कई पक्षों संबंधी सामग्री एकत्रित की। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अर्थात अपने पूर्वजों द्वारा रखे गए पद-चिन्नों का मौजूदा सरोकारों के साथ तालमेल बिठाया। उसे आवश्कयकता अनुसार क्रमबद्ध करके जनसाधारण तक पहँुचाया। परिणामस्वरूप दशकों से भिन्न भिन्न मुहाजों पर संघर्षशील नेताओंकार्यकर्ताओं तथा अन्य पाठकों का कहना था कि हमारे सामने इतिहस के बहुत सारे नए पक्ष आए हैं। हमें ये जानने तथा समझने का मौका मिला है कि अपनी महान ऐतिहासिक विरासत को समझकर तथा उसकी गहराई में उतरकर ही हम अपनी वर्तमान क्रांति की जड़ों को लगा सकते हैं।
गदर शताब्दी ने बीसवीं सदी के आरंभिक दौर के हालातोंसेनाओं तथा क्षेत्रों की ओर पंजाबियों के जाने की मजबूरीसेनाओं तथा क्षेत्रों की आंतरिक स्थितिगदर पार्टी की नींव रखने से पूर्व के हालातआधार-शिला रखनेवतन की ओर कूच करनेगदर पार्टी के प्रोग्रामबलिदान तथा महान लक्ष्यों से संबंधित ज्ञान प्राप्त करने का विशेष अवसर प्रदान किया है।
साम्राज्यवादी प्रबन्धप्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष गुलामी, 1947 से पुर्व के हालात, 1947 में स्वतंत्रता के नाम पर हुआ सत्ता परिवर्तन जैसे मुद्दे गदर शताब्दी अभियान में केन्द्रित हुए। गदर पार्टी प्रोग्राम की  प्रासंगिकतागदर पार्टी बनाने की प्रासंगकिता गदर लहर के मौजूदा उद्देशयगदर लहर का साहित्य पर प्रभाव आदि विषयों पर विचार-चर्चाएँ हुईं। गदरी बाबे कौन थेइस विषय से जुड़े अलग-अलग पहलूओं पर विचार-विमर्श हुए।
अँगुली पर गिने जाने वाले इक्का-दुक्का व्यक्तियों को कुछ देशों में कुछ ताकतों तथा उनकी भाषा बोलने वाले मीडिया ने पीठ थपथपा कर बहस छेडऩे के लिए उकसाया। गदरी क्रांतिकारियों के विचारोंराजनीतीउद्देश्यों कथनी  करनी में समानता से बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश करते हुए निराधार मुद्दे उठाएजिनका चेतनायुक्त बुद्धिजीवी वर्ग ने दलील सहित उत्तर दिया। इस पलटवार के आगे ये साम्प्रदायक संगत वाले तथाकथित बुद्धिजीवी टिक नहीं पाए।
गदरी क्रांतिकारियों ने गौरवमयी इतिहास को जनता के दिलों से निकालनेहथियानेअपने रंग में रंगने तथा अपने कुकर्मों पर पर्दा डालने के लिए सहारा लेने के सभी प्रयास इस शताब्दी के समय नाकाम हुए हैं। साम्राज्यवादियों तथा उनके दलालों के सेवादार शासकों द्वारा यादगारें बनाने के ऐलान धरे-धराए रह गए। क्रांतिकारी देशभक्ति के रंगों में रंगे प्रोग्रामों के सामनेगदर शताब्दी की लहर के सामने शासकों की मक्कार कोशिशें नाकाम होकर रह गईं। शायद अब वो अगले चुनावों के दिनों सें ऐसे ऐलानों से धूल झाडऩे का कार्य फिर करेंगे।
गदर शताब्दी के इस महत्वपूर्ण तथा ऐतिहासिक अवसर पर केन्द्रीय या प्रांतीय शासकों की ओर से सिक्के अथवा टिकटें जारी करने तक का कष्ट भी नहीं उठाया गया।  ही यादगारें बनाने का ऐलान याद किया गया। इससे मालूम होता है कि अब शासकों तथा जनता के अपने-अपने विपरीत एजन्डे और भी साफ तथा स्पष्ट होते जा रहे हैं। असलीयत से पर्दे उठते जा रहे हैं।
गदर शताब्दी के समय साम्राज्यवाद के विरुद्धजागीरदारी के विरुद्धकॉरपोरेट घरानों के विरुद्धनई साम्रज्यवादी नीतियों के विरुद्धऔरत वर्ग पर तथा और जन-विरोधी सांस्कृतिक हमलों के विरुद्ध आवाम (जनताकी लहर ने शानदार अंदाज में अपना मोर्चा संभाला है।
पाँच दिवसीय गदर शताब्दी मेले में गायनभाषणपेंटिंगसामान्य-ज्ञान मुकाबलेकवि-दरबारकोरियोग्राफियाँशहर में बेमिसाल मार्चझंडा लहराने की रस्मझंडे का गीतनाटक तथा गीत-संगीत आदि के संदेशों में केन्द्रीय भाव यह रहा कि गदरी क्रांतिकारियों के प्रोग्राम वाली खरी आजादीलोकतंत्रजनसमूह की साँझेदारी वाला राज तथा समाज बनाने के लिए नए अंदाज में नए क्रांतिकारी युद्ध छेडऩे की आवश्यकता हमारे समक्ष है।
इस मेले में विश्व-प्रसिद्ध लेखिका अरुन्धति राय तथा जन-हितैषी प्रतिबद्धता वाले फिल्मकार संजकाक ने आम जनता की भांति शामिल होकर गदरी क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलियां अर्पित कीं। उन्होंने मोमबत्ती-मार्च में शामिल होकर उन्हें सलामी दी।
पांच दिनों तक लगातार चलने वाले मेले के लिए आर्थिक सहायताप्रबंधकीय जिम्मेदारी तथा वालंटीयरों से लेकर लोगों के लिए आवश्यक सेवाएँलोगों ने स्वयं ही निभाईं। वर्णनयोग्य है कि पांच-दिवसीय इस विशाल मेले में किसी चाबी के छल्ले तक के गुम होने की भी सूचना नहीं मिली। दिन-रात नियमबद्ध अंदाज में नौजवान लड़के-लड़कियों का इस क्रांतिकारी सांस्कृतिक मेले में भाग लेना उन शासक वर्गीय प्रचारों के मूँह पर तमाचा है जिनका कहना है कि कुमार्ग पर चलने की जिम्मेदार नौजवान पीढ़ी खुद ही है। इस मेले में नौजवान पीढ़ी के बड़े हिस्से के हाथों में ही प्रबंधकीय जिम्मेदारी की बागडोर थी।
यह भी वर्णनीय है कि विदेशी पंजाबी परिवारों के परिवार इस मेले में बड़े उत्साह एवं जोश के साथ शामिल हुए। उन्होंने आर्थिक मदद कीभले ही वे कई वार अपनी पारिवारिक खुशियों तथा दु:खों में शरीक  हो सके हों। मेले में अपने तौर पर ही उत्तराखण्डअहमदाबादमहाराष्ट्रदिल्ली तथा जम्मू आदि प्रांतों से कलाकारों ने भाग लिया तथा मेले में क्रांतिकारी रंगत बिखेरी।
गदर पार्टी स्थापना शताब्दी आने वाले वर्षों में आने वाली शताब्दियों का आगाज करने में सफल हुई है। एक गदर शताब्दी का शिखर अगली शताब्दियों का आरंभ हो गया है। वर्णनयोग्य है कि कामागाटा मारू जहाज तथा बजबज घाट साका शहादत शताब्दी (1914-2014), शहीद करतार सिंह सराभा तथा साथियों की शहादत शताब्दी (1915-2015), बर्मा साजिश केस शताब्दी (1916-2016) तथा रूसी क्रांति शताब्दी (1917-2017) को संबोधित होने के लिए बिगुल बजा चुकी है गदर पार्टी स्थापना शताब्दी।
लोक-मोर्चा पंजाब की सरगर्मियां
गदर लहर की विरासत को बुलंद करने के लिए लोक-मोर्चा पंजाब की तरफ से प्रांत में जोरदार प्रचार अभियान चलाया गया। ये अभियान जिन उद्देश्यों को सामने रखकर चलाया गया वे इस प्रकार थेवर्तमान परिस्थितियों में गदर लहर की प्रसंगकिता तथा सकारात्मकता को उभारा जाएगदर लहर के तथाकथित वारिसों की वासतविकता बेनकाब की जाएदेश में चल रहे साम्राज्यवादी-सामंती निजाम को जड़ से परिवर्तित करके गदर लहर के आदर्शों वाले खरे लोकतांत्रिक-स्वतंत्र राज का निर्माण किया जाए। गदर लहर की सौवीं वर्षगाँठ के समागमों का आयोजन कर रही देशभक्त यादगार कमेटी जालंधर के आमंत्रण पर उस समारोह में और उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हुए लोक-मोर्चा पंजाब ने प्राँत में अभियान संबंधी एक हस्तपर्चा (पैंफलिटछपवाकर बाँटा। इस संबंध में विभिन्न स्थानों पर विभिन्न वर्गों की सभाएँ भी बुलाई गई।
आरंभ में प्रांतीय स्तर पर मीटिंग की गई। जिसमें सभी इकाइयों में से नेताओं तथा सदस्यों ने भाग लिया। इस मीटिंग में वर्तमान समय के हालातों में इस लहर की प्रासंगिकता तथा सार्थकता को उभारा गया। 1 नवंबर के देशभक्त यादगार कमेटीजालंधर के समागम में जाने तथा भाग लेने के लिए पंजाब के लोगों को शामिल होने के मुद्दे को उभारा गया।
(सुर्ख रेखानवम्बर-दिसम्बर, 2013)







मेला गदर शताब्दी-2013
(डी.वी.डी.-पंजाबी)
झण्डे का गीत
नए युग का गीत
लेखकअमोलक सिंह
निर्देशकहरविन्दर दीवाना तथा रुपिन्दर राजू
देशभगत यादगार कमेटीजालन्धर
फोन: 0181 2458224




"सुर्ख रेखाकम्यूनिसट क्रांतिकारी पब्लिकेशन हैजो लोगों को सामाजिक क्रांति की जरूरत एवं महत्व के बारे में जागृत करने के लिए सक्रिय है। "सुर्ख रेखाइस पब्लिकेशन की तरफ से पंजाबी में निकाली जाने वाली दो मासिक पात्रिका है। इस पैम्फलिट में लिये गए लेख '"सुर्ख  रेखाके सितम्बर-अक्तूबर, 2013 तथा नवम्बर-दिसम्बर 2013 अंकों में से अनुवादित हैं।


संपर्क के लिए पता-
सुर्ख रेखा प्रकाशन
मकान नं. 15509, गली नं. 1
हजूरा-कपूरा कलोनीबठिन्डा (151001)
पंजाब।

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