बठिंडा में हुई राज्य स्तरीय कन्वेंशन का संदेश:
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तीव्र भूमि सुधारों की मांग को ले लामबंद हों खेत मजदूर और किसान
- जमीन प्राप्ति और सुरक्षा
के लिए संघर्षों के साझा आधार को सुदृढ़ किया जाए
पंजाब खेत मजदूर यूनियन और लोक मोर्चा
पंजाब द्वारा 29 अगस्त
को बठिंडा में भूमि प्राप्ति और सुरक्षा के मुद्दों पर एक राज्य स्तरीय कन्वेंशन आयोजित
की गई और इन मुद्दों पर किसानों और खेत मजदूरों को लामबंद करने के लिए राज्य में
"फिर से करो भूमि वितरण" नामक एक लामबंदी
अभियान शुरू किया गया। अनाज मंडी में एकत्र हुए इस सम्मेलन में दोनों संगठनों के सक्रिय
कार्यकर्ता, संघर्षशील किसान कार्यकर्ता और नेता भी शामिल हुए।
इस
सम्मेलन को दिल्ली से पहुंचे जम्हूरी अधिकारों की एक प्रमुख कार्यकर्ता डॉ नवशरण ने
विशेष रूप से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश की सरकारें भूमि सुधारों के ज़रिए
ज़मीनों की अन्यायपूर्ण रूप से नाबराबर मलकियत को ख़त्म करने के औपचारिक एजेंडे को
तो बहुत पहले ही छोड़ चुकी हैं और इसके उलट, ज़मींदारों
के साथ-साथ अब कॉर्पोरेट घराने भी विशाल भूखंडों की मलकियत के
ज़रिए नए ज़मींदारों के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने किसानों की ज़मीनों को कंपनियों
को सौंपने के लिए देश भर में किए जा रहे हमले के पैमाने और गंभीरता पर चर्चा की। उन्होंने
बताया कि कैसे देश और राज्यों की सरकारें साम्राज्यवादी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारोबार
के लिए भूमि बैंक बनाने की योजना बना रही हैं और पंजाब की लैंड पूलिंग नीति भी इसी
लैंड बैंक नीति का एक हिस्सा थी। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन की बेहतरी के लिए,
कंपनियों को ज़मीन सौंपने के बजाय, भूमि सुधारों
के ज़रिए खेतिहर मज़दूरों और ग़रीब किसानों को ज़मीन का मालिकाना हक़ देने की ज़रूरत
है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने के लिए देश में भूमि सुधार
बेहद ज़रूरी हैं। उन्होंने भूमि के न्यायपूर्ण बटवारे और किसानों की जमीनों पर हो रहे
हमलों से सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण और बुनियादी मुद्दों को लोगों के बीच लामबंदी का
मुद्दा बनाने के लिए दोनों संगठनों के प्रयासों का स्वागत किया।
पंजाब
खेत मज़दूर यूनियन के राज्य सचिव लछमन सिंह सेवेवाला,
लोक मोर्चा पंजाब के राज्य सचिव जगमेल सिंह के अलावा प्रमुख किसान नेता
सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। नेताओं ने लोगों से आह्वान
किया कि वे तीब्र भूमि सुधारों को लागू करके खेत मजदूरों और भूमिहीन किसानों को भूमि
और कृषि उपकरणों का मालिक बनाने के मूल मुद्दे पर लामबंद हों और इससे संबंधित मांगों,
जैसे: भूमि हदबंदी अधिनियम को सख्ती से लागू करना,
जमींदारों के लिए अतिरिक्त भूमि रखने का रास्ता बंद करना, सभी परिवारों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए जरूरत के अनुसार भूमि सीमांकन को
तर्कसंगत बनाना, साहूकारों की लूट को खत्म करना, सरकारी नजूल और बेनामी जमीनों को खेत मजदूरों और भूमिहीन किसानों के लिए आरक्षित
करना और बड़ी कंपनियों को उनके हस्तांतरण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना, आबादकार किसानों को भूमि का मालिकाना हक देना और पूर्व और वर्तमान जमींदारों
द्वारा बटाईदार किसानों की जमीनों को जब्त करने के कदमों को रोकना इत्यादि के लिए संगठित
हों और संघर्षों के मैदान में उतरें। वक्ताओं ने इन मांगों के समाधान को एक वैकल्पिक
जनहितैषी विकास मॉडल से भी जोड़ा और इन कदमों को जनहितैषी विकास का रास्ता अपनाने की
दिशा में बुनियादी कदम बताया। कृषि क्षेत्र से सामंती शोषण के खात्मे के साथ-साथ साम्राज्यवादी शोषण के खात्मे की आवश्यकता को भी उभरा गया। इन मांगों को
हासिल करने के लिए साधारण औपचारिक संघर्षों से आगे बढ़कर, उग्र
जनसंघर्षों की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
खेत
मजदूर प्रवक्ता ने जहाँ जातिगत उत्पीड़न और भेदभाव की परिघटना को भूमि के स्वामित्व
के अभाव से जोड़ा, वहीं किसान नेता ने किसानों
की भूमि पर हो रहे हमलों से सुरक्षा और जमीन प्राप्ति के संघर्षों में खेत मजदूरों
और किसानों की एकजुटता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जाति के आधार पर ज़मींदारों द्वारा
किसानों को खेत मज़दूरों के ख़िलाफ़ लामबंद करने के कू-चलन को
परास्त कर देने तथा किसानों और खेत मज़दूरों के, जमीनों पर हो
रहे हमलों से सुरक्षा और जमीन प्राप्ति के साझा हितों को आगे बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर
दिया। उन्होंने जातिगत अहंकार को सिरे से नकारते हुए इसे किसान-खेत मज़दूर एकता में एक बड़ी बाधा बताया। उन्होंने तथाकथित निचली जातियों के
लोगों की महान श्रमिकों के रूप में सराहना की। लोक मोर्चा पंजाब के प्रवक्ता ने पंजाब
में ज़मीन प्राप्ति के लिए उठ रही आवाज़ और खेत मज़दूरों में ज़मीन के अधिकारों के
लिए तीब्र हो रही मांग का ज़िक्र किया और संगरूर में खेत मज़दूरों द्वारा ज़मीनों पर
अपने अधिकार जताने के घटनाक्रम को इस तीब्र हो रही मांग की अभिव्यक्ति के तौर पर एक
शुभ संकेत बताया।
पंजाब
खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ज़ोरा सिंह नसराली की अध्यक्षता में आयोजित इस
सम्मेलन के दौरान संयुक्त रूप से घोषणा की गई कि इन मुद्दों पर अगले महीने पंजाब के
विभिन्न इलाकों में सम्मेलन और जन-प्रदर्शन
आयोजित किए जाएँगे। सम्मेलन के दौरान एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें मांग
की गई कि लैंड पूलिंग नीति के रद्द होने के बाद अब पंजाब सरकार द्वारा वैकल्पिक तरीकों
से पंचायती ज़मीनों के अधिग्रहण के लिए अपनाए जा रहे कदमों को तुरंत रोका जाए और पंचायती
ज़मीनें बेचने के प्रस्ताव पारित करने के जो निर्देश दिए जा रहे हैं उन्हें तुरंत वापस
लिया जाए। इसके साथ ही, सम्मेलन में राज्य में बाढ़ की गंभीर
स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई और बाढ़ से प्रभावित लोगों के साथ अपनी सहानुभूति व्यक्त
की गई। उन्होंने सरकार से माँग की कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए युद्धस्तर
पर राहत कार्य चलाए जाएँ और सरकारी खजाने से पुनर्वास व मुआवज़े के लिए तुरंत कदम उठाए
जाएँ। संगठनों ने सभी जन-पक्षधर संगठनों और जन-पक्षधर ताकतों से बाढ़ प्रभावित लोगों की हर संभव मदद के लिए आगे आने का आह्वान
किया। सम्मेलन के अंत में एक प्रतीकात्मक मार्च भी निकाला गया, जिसमें इन माँगों को लेकर ज़ोरदार नारेबाज़ी की गई।
सम्मेलन
के आयोजक नेताओं ने कहा कि आज के सम्मेलन में हुई चर्चाओं को अगले महीने तक खेत मज़दूर
बस्तियों और ग़रीब व भूमिहीन किसानों तक पहुँचाया जाएगा और उन्हें इन मुद्दों पर लामबंद
करते हुए ज़ोरदार संघर्षों की नींव रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। दोनों संगठनों
ने इन मुद्दों पर चर्चा करते हुए एक पुस्तिका भी प्रकाशित की है,
जिसे आने वाले दिनों में अभियान के दौरान गाँवों में वितरित किया जाएगा।
इस
सम्मेलन का मुख्य संदेश भूमि पुनर्वितरण के सवाल और उससे जुड़े मुद्दों के साथ-साथ, इन मुद्दों को अपनी जमीनों पर हो रहे हमलों से सुरक्षा के लिए संघर्षरत किसान आंदोलन के
सरोकारों से जोड़ना था। जमीनों की सुरक्षा और जमीन प्राप्ति के सरोकारों के बीच आने
वाली जातिगत बाधा को एक सही वर्गीय दृष्टिकोण से संबोधित होने का संदेश भी उभारा गया।
इस प्रकार, इस सम्मेलन के द्वारा, एक क्रांतिकारी
भूमि आंदोलन के निर्माण के लिए आवश्यक सही दिशा को उजागर किया गया। आशा है कि इस दिशा
के अनुरूप लामबंदी, राज्य में भूमि मुद्दे को आवश्यक सही संघर्ष
चौखटे में उभारने का साधन बनेगी।
