अमेरिकी साम्रायवादिओं द्वारा वेनेजुएला की घेराबंदी
पूर्णतः आक्रमणकारी और अत्यंत
अहंकारी अमेरिकी साम्राज्यवाद की ट्रंप सरकार अब एक और युद्ध छेड़ने जा रही है। इस दफा इस अन्यायपूर्ण और निराधार युद्ध का निशाना लातिनी अमेरिकी देश वेनेजुएला बनने जा रहा है। अमेरिकी साम्राज्य के संरक्षण और रज़ा के अनुसार चलने से इन्कारी वेनेजुएला की वर्तमान निकोलास मादुरो की अगुवाई वाली सरकार को अमेरिकी साम्राज्यवादी शुरू से ही स्वीकार करने से इनकार करते आए हैं। इस सरकार को उखाड़ फेंकने और उसकी जगह अमेरिकी साम्राज्य की कठपुतली सरकार स्थापित करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते रहे हैं। पिछले लगभग एक दशक से वेनेजुएला के पेट्रोलियम उद्योग और अन्य क्षेत्रों पर अमेरिकी साम्राज्यवादियों द्वारा मनमाने ढंग से थोपे गए बेशुमार आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों तथा अन्य उक्साहटपूर्णन कार्रवाइयों के बावजूद वे अपने इस मकसद में असफल रहे। अब ट्रंप प्रशासन द्वारा सितंबर 2025 के बाद मादुरो सरकार को चलता करने की मुहिम को और तीखा कर दिया गया है। अब सैन्य शक्ति का उपयोग कर उपरोक्त मकसद हासिल करने के लिए जोर-शोर से तैयारी चल रही दिखाई दे रही है। इस आक्रामकी सैन्य हमले के लिए मादुरो सरकार पर नशा तस्करी, गैर-कानूनी प्रवास में संलिप्तता, जम्हूरी अधिकारों के हनन जैसे बेतुके इल्जाम लगाकर हमले का आधार तैयार किया जा रहा है।
वेनेजुएला की कड़ी नाकाबंदी
मादुरो सरकार को उखाड़
फेकने और अमेरिकी रज़ा के अनुसार चलने वाली कठपुतली सरकार स्थापित करने के लिए सितंबर 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा आक्रामक कदमों में अचानक तेजी लाई गई। इसके द्वारा वेनेजुएला से सटे कैरिबियन समुद्री क्षेत्र में 15,000 सैनिक तैनात कर दिए गए। अमेरिका के सबसे बड़े समुद्री युद्धपोत बेड़े - यू.एस.एस. गेराल्ड आर. फोर्ड सहित दर्जनों अन्य समुद्री युद्धपोत वेनेजुएला से सटे समुद्री क्षेत्र में तैनात कर दिए गए, जिनमें गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, न्यूक्लियर पनडुब्बी और कई अन्य घातक युद्धपोत शामिल हैं। इस आक्रामक धाड़ में सबसे आधुनिक एफ-35 विमान सहित अनेक जहाज, भयंकर हेलीकॉप्टर और ड्रोन शामिल हैं। अमेरिकी साम्राज्यवादियों द्वारा वेनेजुएला की पूर्ण समुद्री नाकाबंदी कर दी गई है। वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में भी अमेरिकी धौंसबाजों ने उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस तरह पूर्ण नाकाबंदी करके वेनेजुएला के तेल निर्यात को रोक दिया गया है। व्यापार के नकारात्मक रुख से प्रभावित होने के कारण वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ रहा है। नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के नाम पर अमेरिकी धाड़वी सेना ने समुद्री नावों पर मिसाइल एवं अन्य हवाई हमले करके अब तक वेनेजुएला के 100 से अधिक नागरिकों को मार डाला है। वेनेजुएला से तेल ले जाने वाले कई समुद्री टैंकरों पर अमेरिका ने पाबंदियां लगा दी हैं। वेनेजुएला के क्यूबा और चीन को तेल ले जा रहे दो टैंकरों को अमेरिकी सेना ने कब्जे में लेकर उन टैंकरों और उनमें मौजूद 20-25 लाख बैरल कच्चे तेल को जब्त कर लिया है। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को नशा तस्करी का सरगना घोषित कर उनकी गिरफ्तारी पर भारी इनाम घोषित कर रखा है। अनेक अन्य धौंसबाज कदम अमेरिकी धाड़वी पहले से ही उठा चुके हैं या उठा रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन की यह
सीनाजोरी वेनेजुएला की आजादी और संप्रभुता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है। यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों को पूरी तरह पैरों तले रौंदने के समान है। खुली-नंगी गुंडागर्दी और धौंसबाज़ी है। वेनेजुएला पर थोपी गई नाकाबंदी और आर्थिक-व्यापारिक प्रतिबंध उसके खिलाफ युद्ध की खुली घोषणा है।
अमेरिकी प्रशासन वेनेजुएला पर अपने
हमले को जायज ठहराने के लिए वेनेजुएला सरकार पर नशा एवं मानव तस्करी के जो इल्जाम लगा रहा है, उसका कोई पुख़्ता सबूत दुनिया के लोगों के सामने नहीं रख सका। वह एक महाशक्ति और विश्व चौधरी होने के ग़रूर में यही समझते हैं कि जो उन्होंने कह दिया, वही सच है। वे किसी अंतरराष्ट्रीय कायदे कानून
के पाबंद नहीं हैं। यह खुली-नंगी धौंसबाजी है, गैंगस्टरों वाला तर्क है। इराक और लीबिया जैसे देशों पर अमेरिकी साम्राज्यवादी हमलों के लिए जो मनगढ़ंत और निराधार दोषारोपण का सहारा लिया गया था, वही कहानी अब वेनेजुएला पर हमले के लिए दोहराई जा रही है।
वेनेजुएला की प्राकृतिक संपदा पर नजर
यह बात
अब किसी से छिपी नहीं कि नशा तस्करी जैसे लगाए जा रहे अमेरिकी इल्जाम तो सिर्फ एक गढ़ंत बहाना है। असल निशाना वेनेजुएला के तेल भंडार और अन्य प्राकृतिक संपदा है। वेनेजुएला के पास दुनिया के किसी भी देश के तेल भंडारों से बड़े, लगभग 300 अरब बैरल तेल रिजर्व हैं। अमेरिका तीखी हो रही अंतर‑साम्राज्यवादी अंतर्विरोध की परिस्थितियों में उन भंडारों पर ललचाई नजरें गड़ाए बैठा है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 के दौरान अपनी चुनाव मुहिम में ट्रंप खुल्लमखुल्ला कहता रहा है कि उसका निशाना हमेशा यही रहा है कि वेनेजुएला को बदले में कुछ भी दिए बिना उसके तेल को अमेरिका अपने कब्जे में ले ले। वेनेजुएला सरकार का आरोप है कि वेनेजुएला पर अमेरिकी धाड़वी हमले का सोचा समझा मकसद है कि वेनेजुएला की ऊर्जा संपदा को वेनेजुएला के लोगों से छीन लिया जाए। वेनेजुएला के एक सरकारी बयान में कहा गया है:-
“वेनेजुएला
को लंबे समय से जिस हमले का निशाना बनाया जा रहा है, उसका असल कारण अब जग-ज़ाहिर हो चुका है। इसका कारण न प्रवास का मुद्दा है, न नशा-तस्करी है और न ही जम्हूरियत या मानव अधिकारों का हनन है। इसका असल कारण हमेशा से ही हमारे देश की प्राकृतिक संपदा, हमारे तेल, हमारे ऊर्जा स्रोतों पर लूटेरों की
मैली नजर रही है - उन स्रोतों पर जो सिर्फ और सिर्फ वेनेजुएला के लोगों की संपत्ति हैं।”
आखिरकार बिल्ली थैले से बाहर आ ही गई
मनगढ़ंत और लंगड़े-लूले बहानों से वेनेजुएला पर हथियारबंद हमला करके वेनेजुएला की नाकाबंदी कर बैठे अमेरिकी धौंसबाजों के मुंह से भी आखिर सच फूट निकला है। वेनेजुएला से क्यूबा को तेल ले जा रहे टैंकर की जब्ती के बाद ट्रंप ने 16 दिसंबर को “ट्रुथ सोशल” पर पोस्ट में आखिर खुलासा किया है:
“वेनेजुएला
को दक्षिण अमेरिका के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े युद्ध बेड़े ने पूरी तरह घेर लिया है। यह घेराबंदी और बढ़ती ही जाएगी और इसकी वेनेजुएला पर ऐसी भयानक जकड़ होगी जिसका सामना उसने आज तक कभी नहीं झेला होगा। यह घेराबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक वे (यानी वेनेजुएला) वह सारा तेल, जमीन और अन्य संपत्ति यू.एस.ए. को वापस नहीं लौटा देते जो उन्होंने पहले हमसे हथिया ली थी। मादुरो की अवैध सरकार इन हथियाए तेल स्रोतों का तेल बेचकर खुद के लिए धन कमा रही है जिसे वह नशा तस्करी, मानव तस्करी, हत्याओं और अपहरण जैसे अपराधों के लिए इस्तेमाल कर रही है। हमारी संपत्तियों की चोरी करने और आतंकवाद, नशा तथा मानव तस्करी जैसे कई अन्य कारणों से वेनेजुएला की सरकार को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया गया है। इसी वजह से मैं आज अमेरिका द्वारा, वेनेजुएला के अंदर आने या बाहर जाने वाले प्रतिबंधित सभी तेल टैंकरों को रोकने के लिए पूर्ण और मुकम्मल नाकाबंदी का आदेश जारी कर रहा हूं।”
ट्रंप के उपरोक्त
कथन से यह बात स्पष्ट है कि साम्राज्यवादी अमेरिका कैसे मनगढ़ंत बहाने बनाकर अन्य देशों पर धाड़वी हमले करता है और अपने युद्धनीतिक, आर्थिक तथा राजनीतिक मकसदों को आगे बढ़ाने के लिए अन्य देशों की आजादी और संप्रभुता को पैरों तले रौंदता है, उनके संसाधनों को हथिया लेता है और आक्रामक युद्धों के जरिए लाखों जानों की बलि लेता है।
लंबे समय से युद्ध जारी है
वेनेजुएला पर हालिया
अमेरिकी साम्राज्यवादी धौंसबाजी की घटनाएं कोई एकाकी उद्दंडता नहीं बल्कि ऐसी दादागिरी का लंबा इतिहास है। खासकर 1999 में ह्यूगो शावेज की राष्ट्रपति के रूप में जीत और उनके धड़ल्लेदार साम्राज्य-विरोधी कदमों के तहत अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला से खदेड़ने के बाद किसी न किसी रूप में भड़काऊ और धौंसबाजी की कार्रवाइयां अमेरिका की तरफ से जारी रही हैं। समकालिक अमेरिकी सरकारों द्वारा पहले शावेज सरकार को उखाड़ने और फिर 2013 के बाद मादुरो सरकार के खिलाफ साजिशी तोड़-फोड़ और तख्तापलट करने की कोशिशें लगातार चलती रही हैं। 2019 में अमेरिकी प्रशासन द्वारा वेनेजुएला तेल की ढुलाई में लगी कई शिपिंग कंपनियों और मालवाहक जहाजों पर थोपी पाबंदियां आज तक जारी हैं। पिछले 10 वर्षों में अमेरिकी साम्राज्यवादी हकूमतों द्वारा वेनेजुएला की संस्थाओं, कंपनियों, व्यक्तियों आदि पर एक हजार से अधिक आर्थिक और व्यापारिक पाबंदियां थोपी गई हैं जो लगातार जारी हैं। इनका स्पष्ट मकसद वेनेजुएला को आर्थिक रूप से कमजोर और अस्थिर करना है। गत वर्ष अमेरिका ने वेनेजुएला के दो हवाई जहाजों को इन पाबंदियों की आड़ तले कब्जे में लेकर जब्त कर लिया। वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी के 15 हवाई जहाजों की उड़ानों पर पाबंदियां लगा रखी हैं और उनकी तमाम सम्पत्तियाँ को जाम कर दिया है। वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी की अमेरिका में सहायक कंपनी की संपत्ति भी जाम कर दी गई है। विदेशों में वेनेजुएला की 8 बिलियन डॉलर की संपत्तियों को अमेरिकी दबाव के चलते, कई अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने इस आधार पर हथिया लिया है कि वे मादुरो सरकार की वैधता को मान्यता नहीं देते। यह सिलसिला बहुत लंबा है। अब वेनेजुएला का ऊर्जा और परिवहन ताना-बाना साम्राज्यवादी हमलों की मार के नीचे आया हुआ है और तेल तथा तेल टैंकरों एवं अन्य सरकारी संपत्तियों को सैन्य शक्ति के जोर पर अमेरिका द्वारा हथियाया जा रहा है। वेनेजुएला की नाकाबंदी के जरिए अर्थव्यवस्था को तबाह किया जा रहा है ताकि भुखमरी की शिकार जनता को सरकार के खिलाफ उकसाकर अपने एजेंटों के जरिए सरकार का तख्तापलट किया जा सके। सीधी सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां भी जारी हैं।
वर्तमान आक्रामक पैतरा - एक बड़ी रणनीति का हिस्सा
अमेरिकी साम्राज्यवादी हाकिमों द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ
छेड़ी गई आक्रामक मुहिम अमेरिका के सिर्फ तात्कालिक आर्थिक हितों से ही प्रेरित नहीं है बल्कि यह एक बड़ी रणनीति का अटूट अंग प्रतीत होती है। अमेरिकी ट्रंप प्रशासन द्वारा पिछले नवंबर महीने में जारी “नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी” में इस बात का बहुत स्पष्ट शब्दों में जिक्र किया गया है कि “पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी वर्चस्व और दबदबा बहाल करना” हमारा लक्ष्य रहना चाहिए और “हमारे इस गोलार्ध" के क्षेत्र में चीन को युद्धनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों (साधनों) की मालिकी या उन पर नियंत्रण करने की क्षमता से वंचित कर देना का लक्ष्य बयान किया गया है। यह लक्ष्य 1823 में अपनाए गए “मोनरो डॉक्ट्रिन” का आज का ट्रंप संस्करण है। मोनरो सिद्धांत के तहत यूरोप की प्रमुख उपनिवेशवादी शक्तियों को उत्तरी अमेरिका और लातिनी अमेरिका के क्षेत्रों में उपनिवेशवादी विस्तार और हस्तक्षेप से खबरदार किया गया था तथा अमेरिका द्वारा यूरोपीय मामलों में हस्तक्षेप न करने का भरोसा व्यक्त किया गया था। नवीनतम अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में सरकार को कहा गया है कि वह “पश्चिमी गोलार्ध के क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों द्वारा युद्धनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संसाधनों को हासिल करने या पूंजी निवेश करने के अवसरों की पहचान करे।” इस दस्तावेज में दोनों महाद्वीपों (उत्तरी अमेरिका और लैटिन अमेरिका) जिन्हें हमारे गोलार्ध का नाम दिया गया है, में अमेरिका के स्वामित्व की प्रभावी ढंग से पुरजोर वकालत की गई है। कहा गया है कि अमेरिका, लैटिन अमेरिका के संसाधनों पर स्वामित्व और नियंत्रण सुनिश्चित करेगा।
उपरोक्त सुरक्षा युद्धनीति दस्तावेज से समझ
में आता है कि ट्रंप क्यों वेनेजुएला के तेल, जमीन और अन्य संसाधनों को अपना तेल और संपत्ति कह रहा है, क्यों ग्रीनलैंड को हर हाल में अमेरिका के लिए हथियाना चाहता है, क्यों पनामा नहर जैसे युद्धनीतिक आवागमन मार्ग पर जबरन अमेरिकी नियंत्रण स्थापित करना चाहता है और चीन के निकट अफगानिस्तान के युद्धनीतिक महत्व वाले बागराम एयरबेस को फिर हथियाने की बातें कर रहा है।
वेनेजुएला में तेल भंडारों और अन्य
प्राकृतिक संसाधनों पर अमेरिकी नियंत्रण, चीन और रूस के साथ किसी भावी युद्ध में मुकाबले के लिए अनिवार्य जरूरत है। ये बड़े तेल भंडार ठीक उसके पिछवाड़े में स्थित हैं। इन पर अमेरिकी एकाधिकार स्थापित करने के अलावा उसकी लातिनी अमेरिका के अन्य देशों के युद्धनीतिक महत्व वाले स्रोतों पर भी नजर है, जिनमें चिली के तांबे और लिथियम के स्रोत शामिल हैं। चीन इस समय वेनेजुएला का सबसे बड़ा कर्जदाता है और उसने 2005 के बाद 62 बिलियन डॉलर का कर्ज वेनेजुएला को दिया है। वह वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। वेनेजुएला का 80 प्रतिशत निर्यात भी चीन को ही होता है। रूस का भी वेनेजुएला के ऊर्जा उद्योग में काफी पैसा लगा हुआ है। चीन का अन्य कई लातिनी अमेरिकी देशों की इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर का निवेश हुआ है। वेनेजुएला के सिर पर मंडरा रहा अमेरिकी सैन्य हमले का खतरा लातिनी अमेरिका में चीन-रूस के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने और खदेड़ने के लिए तैयार किये जा रहे आधार का शुरुआती कदम है।
अपनी विश्वव्यापी युद्धनीतिक जरूरतों के तहत
वेनेजुएला के खिलाफ निर्देशित अमेरिकी हमला भले ही मादुरो सरकार को उखाड़ने में अस्थायी रूप से सफल भी हो जाए लेकिन यह कुकर्म न अमेरिका के लिए सुगम होगा और न ही राजनीतिक रूप से सस्ता। निकोलास मादुरो सरकार को देश के गरीब और मेहनतकश अवाम तथा सेना का मजबूत समर्थन प्राप्त है। नियमित सेना के अलावा मादुरो सरकार को चार लाख के करीब स्वयंसेवी बल का समर्थन प्राप्त है। अमेरिकी कठपुतली सरकार के लिए ज़मीनी स्तर पर कब्ज़ा स्थापित करना और उसे बनाए रखना आसान नहीं होगा। इस हमले से तमाम लातिनी अमेरिकी देशों में अमेरिका विरोधी भावनाओं का प्रसार होगा जिससे लातिनी अमेरिकी देशों में अमेरिकी वर्चस्व स्थापित करना या बनाए रखना और भी कठिन हो जाएगा। ग्रीनलैंड और पनामा जैसे जोखिमों से अमेरिकी साम्राज्य और यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियों में पहले से मौजूद मतभेद और भी गहरे एवं गंभीर हो सकते हैं। अमेरिकी साम्राज्य को विश्व स्तर पर और भी अनेक छोटी-बड़ी चुनौतियों का सामना है और इसकी आक्रमणकारी योजनाएँ और तैयारियां इनमें इजाफा करेंगी।
वेनेजुएला की मादुरो
सरकार अभी तक दृढ़ता से वेनेजुएला के राष्ट्रीय हितों, इसकी आजादी, संप्रभुता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है। इसने घोषणा की है कि “वेनेजुएला अब कभी भी किसी राजशाही या विदेशी शक्ति की कॉलोनी नहीं बनेगा। वह अपने लोगों के समर्थन से खुशहाल वेनेजुएला का निर्माण करने और अपनी आजादी तथा संप्रभुता की रक्षा के रास्ते पर दृढ़ रहेगा।” (30-5-2025)