Monday, April 16, 2012

Surkh Rekha सुर्ख रेखा (Special May Day 2012)


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मई दिन की जन्म -गाथा:
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''आप मेरी आवाज़ को कुचल सकते हो परन्तु एक समय आऐगा जब हमारी ख़ामोशी उन आवाजों से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली होगी, जिन को आप इस समय कुचल रहे हो।''
''मैं यहाँ दूसरे वर्गों के प्रतिनिधियों के सामने एक वर्ग के प्रतिनिधि की हैसियत से बोल रहा हूं। अगर आप यह समझते हैं कि हमें फांसी लगा कर मज़दूर आन्दोलन का गला घोंट देंगें तो लगा दो हमें फांसी । फिर देखना आप अंगारों पर चल रहे होगें, अंगारे, जो यहाँ वहां, आपके आगे -पीछे, हर जगह लपटें बन कर जलेगें। यह ऐसी ज्वाला होगी, जिसको आप बुझा नहीं पाएंगे।''
उपरोक्त शब्द अमरीका के मज़दूर आन्दोलन के बहादर सपूत अगस्ट सपाईस के हैं। अगस्ट सपाईस को शिकागो में मई 1886 को हुए ख़ूनी घटनाक्रम दौरान गिरफ़्तार किया गया और 11 नवंबर 1887 को उसके तीन अन्य साथियों अलबर्ट आर पारसनज़, अडोल्फ फिशर और जॉर्ज एंजल समेत फांसी पर लटका दिया गया। उपरोक्त चारों के अलावा मशहूर शिकागो मुकद्दमे में, सैमूअल जे फीलडन, यजीन शवाब और लूई लिंग को भी फांसी की सज़ा सुनाई गई थी और एक अन्य मज़दूर जुझारू आस्कर नीबे को 15 सालों की कैद की सज़ा सुनाई गई थी। सैमूअल जे फीलडन और यजीन शवाब की फांसी की सज़ा बाद में उम्र कैद में तबदील कर दी गई। लूई लिंग के बारे में सरकार की तरफ से यह समाचार प्रसारित किया गया  कि उसने फांसी के दिन से पहली रात आत्महत्या कर ली।
परन्तु इस समाचार की वास्तविकता बारे कोई नहीं जानता।
इन मज़दूर योद्धाओं की ओर से शिकागो मुकद्दमे के दौरान जिस हौंसले और  द्रढ़ता को अभिव्यक्त किया गया - इसने अमरीकन बुरजूआज़ी की ओर से मज़दूर आन्दोलन अंदर भय पैदा करने और उनकी आवाज़ को कुचल देने के सपने चकनाचूर कर दिए। मज़दूर वर्ग के इन बहादुर सपूतों ने अदालत के अहाते को मज़दूर वर्ग के आकांक्षाओं और वर्गीय नफ़रत की गूँज से  कँपा दिया। मुसकराते  हुए फांसी के तख़्ते की ओर जा रहे इन वीरों की  द्रढ़ता ने अमरीकन पूँजीपतियों के काले इरादों के मुँह पर तमाचा मारा और मज़दूर आन्दोलन की जुझारू प्रथा को चार चाँद लगाऐ।
इन शूरवीरों की जननी  शिकागो के मज़दूर वर्ग को अमरीका की जुझरू व वाम पंथी  मज़दूर आन्दोलन की अग्रगामी टुकड़ी होने का गौरव हासिल था। अमरीकन पूँजीपतियों को, 8 घंटा काम की माँग को लेकर पहली मई को पूरे अमरीका में हुई हड़ताल के सब से तूफ़ानी उठान का सामना शिकागो में करना पड़ा। पहली मई से पहले ÚUçßßæÚU को केंद्रीय मज़दूर यूनियन की तरफ से तैयारी के लिए संगठित किये प्रदर्शन में 25000 मज़दूर शामिल हुए।
पहली मई को शहर के संगठित मज़दूर आन्दोलन के आहवान पर मज़दूरों का विशाल समुद्र अपने ¥õ•ææÚU फैंक कर सड़कों पर उमड़ पड़ा । यह अमरीकी मज़दूर आन्दोलन की ओर से अब तक हुए वर्ग एकता के प्रदर्शनो में से सब से प्रभावकारी  प्रदर्शन था । इस समय 8 घंटो के काम दिन की माँग के महत्व और हड़ताल की व्यापकता और प्रकृति ने आन्दोलन को अहम राजनैतिक अर्थ प्रदान कर दिया था। अगले दिनों की घटनाओं ने इसकी अहमियत को और भी गहरा कर दिया। 8 घंटो के काम की लहर जो पहली मई की हड़ताल के साथ अपने शिखर पर पहुँची अमरीकी मज़दूर वर्ग के जुझारू इतिहास का एक शानदार अध्याय बन गया।
मज़दूर वर्ग के दुश्मन ऐसी हालत को कैसे बरदाश्त कर सकते थे? जुझारू मज़दूर नेताओं को ख़त्म करने और शिकागो की समूची मज़दूर लहर की कमर तोड़ने के इरादों के साथ पूँजीपति मालिकों और शहर की सरकार की सांझी  सशस्त शक्ति  हरकत में आ गई। तीन मई को मकौरमिक रीपर वर्कस के हड़ताली मज़दूरों पर गोली चला कर 6 मज़दूर शहीद कर दिए गए और अनेकों ज़ख़्मी कर दिए गए। 4 मई को इस ख़ूनी हत्याकाण्ड के ख़िलाफ़ हे मार्केट के चौक में विशाल प्रदर्शन  हूआ । शांतिपूर्ण प्रदर्शन  के समाप्त होने से थोड़ा पहले पुलिस की ओर से फिर धावा बोल दिया गया। योजनाबद्ध साजिश के अंतर्गत भीड़ में एक बम फेंका गया, जिस के साथ एक सार्जेंट की मौत हो गई। इस के बाद हुई झड़प में सात पुलिस कर्मचारी और चार मज़दूर मारे गए। हे मार्केट चौक में खेली खून की होली, चार मज़दूर नेताओं के लिए फांसी का फंदा और दूसरों को लम्बी कैद, यह मज़दूर वर्ग के न्याय संगत संघर्ष को शिकागो के पुँजीपतियों का जवाब था और देश भर के पूँजीपति वर्ग के लिए मज़दूर आन्दोलन विरुद्ध वहशी धावों की तरफ इशारा था। 1886 का दूसरा अर्ध अमरीकी पुँजीबाद  की तरफ से 1885 -86 के मज़दूर उभार  द्वारा अपने खोए हूए प्रभुत्व की बहाली के लिए बोले सुसंगठित हल्लô´ का समय था।
परन्तु जैसे शहीद योद्धा अगस्ट स्पाईस ने कहा था ''मज़दूर आन्दोलन का गला दबाने'' की पुँजीबाद की आशा पूरी न हुई और मज़दूर संघर्षों की '' चिंगारियां '' सचमुच ''यहाँ, वहां बुरजूआजी के ''आगे -पीछे'' ''हर जगह ज्वाला बन जल'' उठीं। अमरीकी मज़दूरों की शहादत व्यर्थ न गई। 1889 में पैरिस सोशलिस्ट इंटरनेशनल की पहली कांग्रेस में नीचे लिखा प्रस्ताव परित किया:
''यह कांग्रेस एक विशाल अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन संगठित करने का फ़ैसला करती है ताकि किसी तय हूए दिन पर सभी देशों और शहरों में मेहनतकश जनता सरकारों से काम के घंटे कानूनी तौर पर घटा कर 8 घंटे करने की माँग करे और साथ ही पैरिस कांग्रेस की ¼êâÚUè माँगों को पूरी करने की आवाज़ उठाए। क्योंकि अमरीकी फेडरेशन आफ लेबर ने दिसंबर 1888 की अपनी सेंट लुईस कनवैन्शन में पहले ही ऐसे प्रदर्शन के लिए 1मई 1890 की तारीख़ तह की हुई है। इस लिए इस तारीख़ को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के लिए स्वीकार किया जाता है। अलग अलग देशों के मज़दूरों ने अपने देश की हालत को ध्यान में रख कर इस प्रदर्शन का प्रबंध करना है।''
इस तरह 1890 की पहली मई को दुनिया के अलग अलग शहरों में हज़ारों लाखों के काफ़िले वर्ग एकता के महान प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े । 1891 में यह दिवस 8 घंटो के श्रम वेतन के साथ साथ राष्ट्रों के बीच शांति की गारंटी के दिवस के तौर पर मनाया गया। मज़दूर वर्ग के आन्दोलन का घेरा विशाल होता गया और उपनिवेश और  अर्ध उपनिवेश का मज़दूर वर्ग भी मई दिवस के प्रदर्शन में शामिल होने लगा । मई दिßस संसार ÕéÚUÁê¥æ•æè ·ð¤ ख़िलाफ़ दुनिया भर के मज़दूरों और ©UˆÂèçǸUÌ लोगों की एकजुटता का प्रतीक और विश्व क्रांति के रास्ते पर उनके संग्रामी मार्च को विशिष्ट रूप से दर्शाने वाला अंतरराष्ट्रीय त्योहार बन गया।
























मई दिवस के महान शहीदों को
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मई दिवस की ऐतिहासिक घटनाओं के बाद अमरीकी पूंजीपति वर्ग  की ¥ôÚU से मज़दूर वर्ग ·¤ô ·é¤¿ÜÙð के लिए ÖØ¢·¤ÚU हमले हुए। सरकारी àææâ·¤ô´ पूंजीपति  लुटेरों, पुलिस अत्याचारियों, 碷¤ÚUÅðUÙ के गुंडा-गिरोहों और बुर्जुआ प्रैस ने बल और छल के सभी रिकार्ड तोड़ डाले। लाठियों, गोलियों, छंटनियों, कुर्कियों, जेलों, çßSÍæÂÙô´ का तूफान दिया। इन अत्याचारी हमलों के  कारण एक बार मज़दूर ¥æ‹¼ôÜÙ ·¤ô ¼Õæ ç¼Øæ »ØæÐ 11 नवंबर 1887 को चार योद्धायों को फांसी पर लटका दिया गया ।
सरकारी àææâ·¤ ÌÍæ उनके चाटुकार इस Öý× में थे कि अब मज़दूर अपने साथियों की अंतिम रस्मों के समय दो - चार सौ से अधिक नहीं आऐंगे। इसी लिए उन्होंने पारसनज, स्पाईज, एंजलज, फिशर और लिंग की लाशों को उनके दोस्तों और रिश्तेदारों को सौंप ç¼ØæÐ उन को खुलेआम अंतिम ÚUS×ð´ अदा करने की इजाज़त दे दी परन्तु ÂýçÌÕ¢Ï Ü»æØð »Øð कि यह समय दो घंटो का ही होगा। वह गलियां भी सरकारी ¥çÏ·¤æçÚUØô´ ने तय की, जिन में से जनाज़ा çÙ·¤ÜÙæ था। लेकिन ताकत और नशे के भ्रम में  ¿êÚU àææâ·¤ नहीं जानते थे कि मज़दूर और मेहनतकश लोग अपने शहीदों को कितना प्यार करते हैं। कुछ âר के लिए वे भले ही दब ज़रूर गए थे Âý‹Ìé भयानक से भयानक हमले भी मज़दूर दिलों में से अपने लोकप्रिय नेताओं का मान-सम्मान कम नहीं ·¤ÚU सके थे। इसी कारण मज़दूरों और मेहनतकश लोगों की ¥ôÚU से अपने महान शहीदों को दी ·ý¤æ¢çÌ·¤æÚUè विदाई ने उन को फिर हैरान-परेशान कर दिया।
यह श्रद्धाँजलि मार्च ßæSÌß ×ð´ अनूठा और देखने योग्य था। कोई शोकार्त्त गीत नहीं, कोई मातमी संगीत नहीं। कोई हार का एहसास नहीं। सब से आगे एक ¥ÏðǸU आयू का, सलेटी चेहरे वाला जुझारु, लाल झंडा उठा फ़ौजी मटक के साथ चल रहा था। फिर अर्थी, ढोल वाली »æçǸUØæ¢ और ताबूत थे। इन ऊपर से  खुलीं, पुरानी »æçǸUØô´ में शहीदों के परिवार थे। इन में से एक गाड़ी में  लूसी (पारसनज़) अपने दोनों बच्चों को छाती के साथ Ü»æ° तनी बैठी थी। फिर शहीदों के जुझारु साथी थे, जो चार चार की टोलियों में जंगी-सिपाहियों की भांति चल रहे थे। फिर जजों, वकीलों डाक्टरों, अध्यापकों और इन्साफ पसंद शखशियतों की टोली थी। यह वे थे जिन्होंने पाँच महान नेताओं को बचाने के लिए ¥æç¹ÚU Ì·¤ ÖÚUâ·¤ ·¤ôçàæàæ ·¤è ÍèÐ और सब से पीछे थे वह मज़दूर, जिन के ¥çÏ·¤æÚUô´ ß ‹ØæØ के लिए जूझते ही यह योद्धे फांसी के फन्दे पर झूले थे। इन का कोई अंत नहीं था। यह पैकिंग करने वाले कामगार भी थे, लकडी-आरों वाले भी। पुलिसमैन भी थे और मिलों वाले भी। खदानें में से भी थे और रेल ·¤æÚU¹æÙô´ में से भी। ख़रादिए भी थे और मोलडर भी। वह बेरोज़गार भी थे और खेतों में काम ·¤ÚUÙð ßæÜð अर्ध-बेरोज़गार भी। इन में ग्वाले भी थे और जहाज़ी भी। यह शिकागो से भी थे और दर्जनों ओर शहरों से भी। इन में से कईओं ने अपने विवाह के समय पर पहने सब से बढ़िया सूट पहने हुए थे। परन्तु बहुत से ऐसे थे जिन के पास अपने काम वाले कपड़ों के अतिरिक्त और कपड़े है ही नहीं थे। मगर थे यह साफ़-स्वच्छ । इन की आँखों में आंसू भी थे। गुस्सा, आक्रोश और आग की ÜÂÅð´U भी। अपने महान शहीद- नेताओं  प्रति प्यार, मान और सम्मान भी था और उनके सपनों को पूरा करने के प्रण भी।
देखते -देखते 20000 से भी अधिक मज़दूर और मेहनतकश लोग इस सुर्ख-मार्च में एक-जुट हो गए। इस महान ·ý¤æ¢çÌ·¤æÚUè मार्च को देखने के लिए सारा शहर घरों और काम- धाम को छोड़ कर सड़कों पर आ जुड़ा। मार्च चल रहा था मज़दूर चुप थे। बोलता कोई भी नहीं था, न आदमी न औरतें न बच्चे। जो गलियों में ¹Ç¸ðU थे, बह भी चुप थे। आप उनके साँस तो सुन सकते थे , परन्तु एक शब्द  नहीं सुन सकते परन्तु कंधे के साथ कंधा ÁôǸðU ãéU°, पत्थर जैसे हौसले लिये दहकती आँखें क्या बोल रही थी, किसी को भी ⢼ðãU नहीं था। न मज़दूरों को न लोगों को और न ही सरकारी हाकिमों को। इस लिये जहाँ मेहनतकश और इन्साफ पसंद लोग एक नये युग की आशा लिए मन में âéÙãUÚÔU सपने बुन रहे थे वहां सरकारी ¥çÏ·¤æÚUè और लुटेरा-गिरोह डर के साथ दहल रहे थे। यह श्रद्धाँजलि मार्च,  बिन-बोले एक पैग़ाम दे रहा था कि, ''हमारे महान शहीदों के शरीर तो कत्ल हो सकते हैं परन्तु उनके महान सपने, आशाएं और विचार कभी कत्ल नहीं हो सकते, भविष्य कामगारों का है, लुटेरे और ¥ˆØæ¿æçÚUØô´ का नहीं। देर सुबह सभी प्रकार की लुटेरी और अत्याचारी àæç€ÌØô´ का सफाया करके मज़दूर वर्ग  ¥ÂÙð Öæ» ·¤æ Sß¢Ø ×æçÜ·¤ ãUô»æÐÓÓ
इस »õÚUßàææÜè ·ý¤æ¢çÌ·¤æÚUè मार्च से 碷¤ÚUÅðUÙ के गुंडों और पुलिस आधिकारियों के भी  पसीने छूट पड़े। वे मज़दूरों का रोना-धोना भय और çÙÚUæàææ को देखने के çܰ ÃØæ·é¤Ü थे। परन्तु जब ÁÙëâ×ê¼æØ ·ð¤ â×é¼ý ×ð´ âð ©U×ǸUÌð ãéU° ÌêȤæÙè ’ßæÚU ·¤ô ©U‹ãUô´Ùð ¼ð¹æ Ìô Öõ¿€·ð¤ ÚUãU »°Ð उन्होंने अपनी  आँखें और  बंदूकें धरती की तरफ कर ली: जैसे सत्य की  आँखों में आँखें डालने की हिम्मत न हो।
चाहे इस â×ðÜÙ ×ð´ ¥õ¿æçÚU·¤ Öæá‡æ ÙãUè´ ãéU°, ¥æò¿æçÚU·¤ ÂýâÌæß ÙãUè´ ãéU°, Ìô Öè ×Ù ãUè ×Ù ×ð´ एक फ़ैसला कर लिया। फ़ैसला ØãU कि मज़दूर वर्ग  मई दिन के शहीदों की याद â¼ñß ताजा रखने और उनके अधूरे सपने को पूरा करने के लिए ''मई दिवस '' फिर मनाएगी। इस तरह इन महान योद्धाओं की ·ý¤æ¢çÌ·¤æÚUè मौत, उनके ·ý¤æ¢çÌ·¤æÚUè जीवन की तरह, मज़दूर ¥æ‹¼ôÜÙ की बढ़ोतरी के लिए मील -पत्थर साबित हुई। यह ·ý¤æ¢çÌ·¤æÚUè विदाई इतनी शानदार थी इस पर मशहूर उपन्यासकार हावर्ड फास्ट ने टिप्पणी की कि ''¼ðàæ के इतिहास में पहले कभी भी, तब भी  जब सब से अधिक प्यारा नेता लिंकन मारा था, ऐसा अंतिम संस्कार ÙãUè´ हुआÐÓÓ





मई 1886 का â“æ
»ßÙüÚU ·¤æ §çÌãUæâ·¤ $Èñ¤âÜæ- ×ãUæÙ àæãUè¼ ÕÚUè
Âê¡Áèßæ¼è ‹ØæØ ·¤ÅUUãUÚÔU ×ð´
w{ जून 1893 को गवर्नर (जौहन पीटर ऐलटगैलड) के ऐतिहासिक फ़ैसले ने, मई दिन के शहीदों को फांसी देने के लिए रचे ''अदालती नाटक'' ·¤æ ¹ô¹ÜæÂÙ पूरी तरह नंगा कर दिया।
1992 में गवर्नर जौहन पीटर को 60000 दस्तख़तों वाली एक पटीशन मिली, जिस में निब, फिलडेन, माइकल नेताओं की सज़ा रद्द करने की माँग थी। निचले किसान -वर्ग में से आए इस गवर्नर ने, जिसके दिल में अभी ईमानदारी और साहस जीवित Íð, समूचे मुकद्दमे को फिर से खोलने का फ़ैसला लिया। भले ही उसके एक सलाहकार ने पहले ही चेतावनी  दे दी थी कि ''यदि आप मुकद्दमा सुनð´गे, तो अपराधी को दोष मुक्त कर दð´गे, यदि ऐसा करेंगे, तो अपना रुतबा खो देंगें।ÓÓ परन्तु गवर्नर की ज़िद्द थी  ''चाहे कुछ भी हो, वह बेकसूर हुए तो मैं ×饿$Ȥ कर दूँगा।''
सो, गवर्नर जौहन पीटर ने सारा रिकार्ड इकट्ठा किया और ध्यान के साथ पढ़ा। गवाहियाँ और मज़दूर नेताओं के बयानों का तह तक जा कर ¥ŠØØÙ किया। अदालती रिकार्ड के अतिरिक्त और जो भी मुकद्दमे के बारे में लिखा मिला, पढ़ा। गहरा अध्ययन करने के बाद गवर्नर इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि मज़दूर नेता हर पक्ष से बेकसूर थे। उसने सरकार, पुलिस और पुँजीपतियों की तरफ से किये ¼×Ù का नोटिस लेते हूए अपने फ़ैसले में स्पष्ट लिखा कि ''इस बात की हर संभावना बहुत साफ़ है कि बम किसी ऐसे व्यक्ति की तरफ से फेंका गया जो निजी बदला लेना चाहता था। साफ़ है कि आधिकारियों की तरफ से धारण किये रुख़ का SßæÖæçß·¤ ÂçÚU‡ææ× ऐसा ही होना था। हे -मार्केट की घटनाऔं से पहले के कई सालों में मज़दूरों से सम्बन्धित गड़बड़ी वाली ƒæÅUÙæ¥ô´ घटतीं रही। बहुत से मामलों में 碷¤ÚUÅðUÙ के ¥æ¼çרô´ की तरफ से अनेकों निर्दोष मज़दूरों को योजनाबद्ध गोलियाँ मार कर मारा गया। कातिलों में से किसी पर भी मुकद्दमा नहीं चलाया गया। करौनरज़ (अदालत) में भुगताईं और यहाँ पेश की गवाहियाँ बोलतीं हैं कि कम से कम दो मामलों में Öæ»Ìð  हूए ¥æ¼çרô´ को गोलियाँ मारी गई, जब कि गोलियाँ मारने का कोई ¥ßâÚU (कारण) मौजूद नहीं था। फिर भी, किसी को सज़ा न दी गई। शिकागो में हुई अनेकों हड़तालों ·ð¤ दौरान, पुलिस के कई हिस्से न सिर्फ़ पक्षपात करते रहे बल्कि कानूनी ¥çÏ·¤æÚU Ù ãUôÙð ÂÚU Öè शांतिपूर्वक मीटिंगों पर हमले करके ©U‹ãð´U ¹¼ðǸUÌð रहे। अनेकों मामलों में कानूनी तौर पर निर्दोष लोगों पर लाठीचार्ज करते रहे।
¼×Ù ß अत्याचार की इन ÂçÚUçSÍçÌØô´ का पर्दाफाश करते गवर्नर जौहन पीटर ने मुकद्दमे दौरान भुगताईं गवाहियों का भी ¹ô¹ÜæÂÙ नंगा किया। उन्होंने फ़ैसले में ©UËÜð¹ किया कि ''यह भी बहुत ही स्पष्ट दिखाई देता है कि मुकद्दमे दौरान पेश की गवाहियाँ ×ٻɸU¡Ì Íè´Ð कई बड़े पुलिस ¥çÏ·¤æçÚUØô´ Ùð ¼ÕæÕ ÇUæÜ ·¤ÚU çÙÚUÂÚUæÏ लोगों को जेलों में Èð´¤·¤ कर ¼×Ù -अत्याचार की धमकियां दे  कर डराया, बल्कि उनके ¥ÙéâæÚU चलने वाले गवाहों को पैसा और नौकरियाँ दीं। इस से भी आगे उन्होंने अपराधियों की साज़िश में भागीदारी दिखाने के लिए सोची-समझी मन-»É¸¡UÌ कहानियाँ ƒæÇ¸Uè´Ð रिकार्ड में आए सबूतों के अतिरिक्त कुछ व्यक्तियों ने स्वीकार भी किया कि उन्होंने पैसे लिए थे। इस के साथ कई दस्तावेजी सबूत पेश किये जाते थे।''
गवर्नर जौहन पीटर ने 4 मई की हे -मार्केट रैली के बारे में भी साफ़ किया कि ''रैली पूरी तरह  अनुशासित थी  और नगर का मेयर (प्रधान) ख़ुद इस में उपस्थित था, वह उस समय वहाँ से गया जब भीड़ में से बहुत से लोग चले गए थे। जैसे ही पुलिस  विभाग के कप्तान जौहन, बौनफीलड को पता ¿Üæ कि मेयर चला गया है, वह बाकी बची भीड़ को तितर-बित्तर करने के लिए पुलिस दस्ते समेत वहां आ Âãé¡U¿æÐ पुलिस पहुँचते ही किसी अज्ञात व्यक्ति ने बम फैंक ç¼Øæ....... मुकद्दमे  की कार्यवाही के दौरान बम फेंकने वाले असली दोषियों की कोई सूचना न मिली। उपरोक्त व्यक्ति सिर्फ़ इस आधार पर ही अपराधी ƒæôçáÌ ·¤ÚU दिए गए क्योंकि पिछले समय में इन्हों ने पुलिस-सिपाहियों और पिंकरटेन के आदमियों को कत्ल करने के लिए ©U·¤âæÙð ßæÜð कई भड़काऊ ÌÍæ विद्रोही बयान दिए थे। यहाँ तक कि वे व्यक्ति जिन पर कत्ल का ¥æÚUô लगाया गया, ßô हे -׿ç·ü¤ÅU की रैली में शामिल ही नहीं थे और न ही उन का इस के साथ कोई सम्बन्ध था।''  गवर्नर जब इस फ़ैसले की जाँच-पड़ताल  कर रहा था तो उस âר फ़ैसला देने वाले जज गैरी ने एक मैगज़ीन में हे-׿ç·ü¤ÅU की घटना की समीक्षा ·¤ÚUÌð ãéU° लेख लिखा। उसने 6 सालों बाद भी महान नेताओं ·ð¤ çßL¤h ƒæë‡ææ की ज़हर उगलते  हूए अपने फ़ैसले की ¹ô¹Üè ÃØæØæ की कि ''सज़ा इस आधार पर नहीं हुई कि उन्होंने डेगान की मौत का कारण बनी ख़ास कार्यवाही में सचमुच निजी तौर ÂÚU शामिल हूए है। बल्कि सज़ा का फ़ैसला यह आधार ले कर चलता है कि आम रूप में, उन्होंने भाषणों और ÚU¿Ùæ¥ô¢ के द्वारा लोगों के बड़े समूहों को, न कि विशेष व्यक्तियों को, कत्ल करने की शिक्षा दी और कार्यवाही और इसके समय, स्थान और ¥ßâÚU के सवाल को, ऐसे हर व्यक्ति के इरादे पर छोड़ दिया, जिसने भी उन की नसीहतें सुनी और इस शिक्षा के प्रभाव तले किसी ¥™ææÌ व्यक्ति ने वह बम फेंका जो डेगान की मौत का कारण बना........ ऐसे मुकद्दमे की पहले कोई परंपरा  नहीं है और कानून की किताबों में पहले ऐसे मुकद्दमे  की कोई मिसाल नहीं है।''  गवर्नर जौहन पीटर ने इस ÃØæØæ को अपने फ़ैसले में नोट करते इसका मज़ाक उड़ाते ãéU° कहा '' उन सभी सदियों में, çÁ‹ãUô´ ×ð´ समाजों में सरकार की मौजूदगी रही है और ¥ÂÚUæÏô´ की सज़ाएं दीं जातीं रही हैं, किसी सभ्य ÚUæCþU के किसी भी जज ने पहले ऐसा फ़ैसला नहीं किया।'' मज़दूर नेताओं प्रति विशाल ÁÙ-â×ßð¼Ùæ ·¤æ ©UËÜð¹ ·¤ÚUÌð ãéU° गवर्नर ने नोट किया कि  ''शिकागो के हज़ारों व्यापारी, बैंकर, जज, वकील ÌÍæ अन्य  आदरणीय शहरी इन के लिए रहम की अपील कर रहे हैं। उन की अपील का आधार यह है कि कैदी चाहे असली कातिल भी क्यों न ãUô, वह अपनी बनती ÂØæüŒÌ सज़ा भुगत चुके हैं। परन्तु जिन लोगों ने इस केस की  गहराई के साथ जाँच पड़ताल की है और इस ׿×Üð सम्बन्धी  सभी तथ्यों से ¥ß»Ì हैं, जो इस की कार्यवाही के दौरान मालूम हुए, उन का पक्ष बिल्कुल अलग है। यह लोग रहम की माँग करने की जगह ‹ØæØ का हक मांगते थे। इन लोगों का मानना था कि जजों का  पक्षपाती ढंग के साथ चयन किया गया था। मुख्य जज गैरी और विशेष अफ़सर राइस पहले ही फांसी देने के ऐलान करते रहे। मुकद्दमे दौरान गलत नियम बना कर मज़दूर नेताओं के वकील को बहस  करने का ¥ßâÚU न दिया गया। गवाहों को वहशी अत्याचार और लालच दे कर प्रभावित किया। फिर भी नेताओं पर डेगान को कत्ल करने का दोष साबित नहीं किया जा सका। परन्तु पूंजीपति वर्ग को खुश करने के लिए ही फांसी की सज़ा दे कर ‹ØæØ को कलंकित किया। इस लिए मज़दूर नेता पूरी तरह निर्दोष थे और उन को çÚUãUæ करना ‹ØæØ की माँग है। गवर्नर जौहन पीटर ख़ुद भी इस çÙ‡æüØ पर पहुँचा और उसने पूरे मुकद्दमे को झूठ का पुलंदा कहा और फांसी चढ़े मज़दूर नेताओं समेत सभी को निर्दोष करार देते जेल में बंद नेताओं को रिहा करने का ¥æ¼ðàæ लिखा  ''मेरा यकीन है कि पहले ही ©UËÜð¹ ç·¤Øð »° कारणों की वजह से इस केस में कार्यवाही करना मेरा ·¤ÌüÃØ बनता है। इस लिए मैं सैमूअल फिलडेन, आस्कर निब और माइकल स्क्वैर को आज 26 जून 1893 को पूरी तरह मुक्त करता हूँ।''
सो, गवर्नर जौहन पीटर के इस ऐतिहासिक फ़ैसले ने पूरे अमरीका में नया तूफ़ान ¹Ç¸Uæ कर दिया। दोनों पक्षों से ही यह फ़ैसला महत्वपूर्ण था। पहला, इस फ़ैसले ने पारसनज़, स्पाईज, एंजल, फिशर को भी निर्दोष करार दिया, जो पहले ही फांसी पर लटकाए जा चुके थे। दूसरा रिहा किये नेता भी किसी ¼Øæ-ÖæßÙæ के अधीन रिहा नहीं किये बल्कि यह सत्य पेश किया कि मज़दूर नेता हर पक्ष से निर्दोष थे। इसके साथ ही इस लम्बे ऐतिहासिक फ़ैसले में गवर्नर ने ठोस मिसालें सामने ला कर सरकार, पूंजीपति वर्ग , पुलिस ताकतों, अदालतों और पिंकरटेन के गुंडों का मज़ूदर और जन-विरोधी ·¤ÚUÌêÌ Ù¢»è ·¤ÚU ¼èÐ इसी वजह से गवर्नर को रातों रात पुँजीपतियों और उनके वर्ग-â¢ç»Øô´ ·¤è çƒæë‡ææ का पात्र बना दिया। उस  पर ''अराजकता'', ''हफड़ा -दफड़ी'' और ''गड़बड़ -चौथ'' को प्रोत्साहन देने के  ¥æÚUô लगाऐ गए। बुर्जुआ हिस्सों ने हड़कंप मचाई कि उसने ''‹ØæØ'' और ''ÁÙÌ¢˜æ'' के साथ दग़ा किया है। बुर्जुआ â׿¿æÚU ˜æô´ ने गवर्नर पर जारी हमले तेज़ करते हूए उसे  ÕêɸUUæ सठियाया गया, ''लफौड़'' और ''नीरो'' के विशेषण लगा कर तिलमलाए । परन्तु जौहन पीटर इन ·¤ÆUôÚU ¥æ·ý¤×‡æô´ के आगे अडोल ß शांत-चित रहा। उसने बस इतना ही कहा कि ''मैं इस लिए मानसिक तौर पर तैयार था।'' दूसरी तरफ़ मज़दूर वर्ग  और इन्साफ पसंद लोगों ने गवर्नर के इस फ़ैसले को ''सत्य ß  इन्साफ'' का नाम दे कर जय जय कार की। सचमुच ही इस ऐतिहासिक फ़ैसले ने झूठ की नौटंकी पर सत्य की जीत की मोहर लगा दी।
















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§â ÌÚUãU Âê¡Áèßæ¼è Âñ¼æßæÚUè É¢U» (çÙà¿Ø ãUè ȤæÜÌê-·¤¼ÚU ·¤è Âñ¼æßæÚU, ØæÙè ȤæÜÌê-Ÿæ× ·¤æ çÙ¿ôǸUæ ÁæÙæ ãñU) ·¤æ× ç¼ãUæÇ¸Uè ·¤ô ÕɸæÙð âð, ׿Ùß-àæç€Ì ·¤ô §â·ð¤ çß·¤æâ ß ·¤æØü ·¤è âæ×æçÁ·¤, ÙñçÌ·¤ ß ÖõçÌ·¤ ãUæÜÌô´ âð ßç‹¿Ì ·¤ÚU·ð¤ ·ð¤ßÜ §â·ð¤ çջǸðU ãUæÜæÌ ·¤ô ãUè Âñ¼æ ÙãUè´ ·¤ÚUÌæ, ÕçË·¤ ØãU Sߨ¢ Ÿæ× àæç€Ì (וæ¼êÚU) ·ð¤ ß€Ì âð ÂãUÜð ãUÌæàæ Áô ÁæÙð ß §â·¤è ×õÌ ·¤ô Öè Á‹× ¼ðÌæ ãñUÐ ØãU וæ¼êÚU ·¤è çÁ‹¼»è ·ð¤ ßæSÌçß·¤ âר ·¤ô ƒæÅUæ ·¤ÚU °·¤ çÙàç¿Ì âר ·ð¤ ¼õÚUæÙ Âñ¼æßæÚU ·¤æ âר ÕɸUæÌæ ãñUÐÓÓ
(Âê¡Áè)










Âê¡çÁßæ¼è ¿èÙ ×ð´ ãUæ·¤×ô´ ·¤è Ùè´¼ ãUÚUæ× Ñ
ß»ü ⢃æáü ·ð¤ ÛæÅU·¤ô´ ·¤è °·¤ ÛæÜ·¤
चीन में सामाजिक हलचल के झटके हर नये दिन बढ़ते ही  जा रहे हैं। सरकारी ¥¢·¤Ç¸Uô´ के अनुसार हर साल प्रकट हो रहे जन आक्रोश की घटनाओं की संख्या जो v~~x में }|®® थी, वह w®v® में बढ़ कर ~®®®® तक जा पहुँची है। न्यूयारक टाईमज़ अनुसार बीते साल ऐसी घटनाओं की संख्या  v}®®®® तक जा पहुँची है। इन में हडतालें, धरने, रैलियाँ और पुलिस के साथ भिड़न्तें शामल हैं। % से भी ज्यादा  घटनाएँ जमीनी ׿×Üô´ से सम्बन्धित होती हैं। ऐसी  घटनाओं ने पूरे चीन को ही अपनी ÜÂðÅU में  लिया हुआ है। पश्चिमी चीन का ¥Âðÿææ·ë¤Ì कम विकसित क्षेत्र भी इन से बचा हुआ नहीं है।
परन्तु चीनी ·¤ØêçÙâÅU पार्टी के  इतिहास में यह पहली घटना है जब w®®®® की  आबादी वाले एक गांव ने पार्टी के çÙØ¢˜æ‡æ ·¤ô Üæ¢ƒæ ·¤ÚU çß¼ýôãU का झंडा उठा लिया  हो। यह चीन के दक्षिणी Âýæ¢Ì गुआंगडोंग का एक तटवर्ती गांव  वूकान है जिन के समूचे लोग सितम्बर महीने से गांव  के âæ¢Ûæð सूअर फार्म समेत बड़े ज़मीनी क्षेत्र को आलीशान बंगलों के  निर्माण के लिए सरकार की ¥ôÚU से छीने जाने के çßL¤hU संघर्ष कर रहे हैं।
पिछले लगभग डेढ़ दो ¼àæ·¤ô´ से जब से सरकार ने ज़मीनें हड़पनी शुरू की हैं तब से वूकान निवासियों में रोष ß गुस्सा  गहराता जा रहा है। अब तक इस गांव  की एक हज़ार °·¤Ç¸U से अधिक ज़मीन ãUǸUŒÂè जा चुकी है। इस बार लोगों का ¥æ·ý¤ôàæ फूट ÂǸUæ और उन्हों ने संघर्ष का çÕ»éÜ बजा दिया।
चीन में कृषि योग्य-भूमि पर किसानों की व्यक्तिगत मलकियत नहीं है। लगभग सारी की सारी ज़मीन गांव की âæ¢Ûæè होती है। चीन की सरकार के ßÌü×æÙ कानून अनुसार किसान अपनी खेती के लिए ज़मीन ÂÅUðU पर लेते हैं, जो ¼àæ·¤ô´ Ì·¤ चलता रहता है। वह ज़मीन ·¤æ ग़ैर-खेती ©UgðàØô´ के लिए ©UÂØô» नहीं कर सकते और सिर्फ़ सरकार को ही अपनी ज़मीन बेच सकते हैं, सरकार ही ज़मीन की कीमत तह करती  है, ç·¤âæÙô´ को यह अधिकार नहीं है। सरकार ख़ुद यह ज़मीनें आगे निवास, व्यापारिक या औद्योगिक ©UgðàØô´ के  ©UÂØô»  के लिए प्राईवेट कंपनियाँ को बेचती है। इस तरह बड़े ज़मीनी क्षेत्र लोगों की मर्ज़ी ·ð¤ बगैर, उन से चोरी किये फैसलों के अनुसार कम दामों में या कई बार बगैर मुआवज़ा दिए ही उन से ÀUèÙð जा रहे हैं। ऐसी सौदाबाजी में  सरकार तो कमाई करती ही है, इस के अतिरिक्त SÍæÙèØ पार्टी और सरकारी अधिकारी भी कमिशन, दलाली और कंपनियाँ को खुश  करने के बदले में खूब हाथ रंगते हैं। वूकान के ßÌü×æÙ ज़मीनी सौदे के द्वारा सरकार की vz{ मिलियन डालर की कमाई पर आँख थी।
यह ज़मीनी सौदा रद्द करने की वूकान के लोगों की माँग जब SÍæÙèØ काउंटी ÌÍæ प्रांतीय सरकार ने अनसुनी कर दी तो वह हजारों की संख्या में  âǸU·¤ô´ पर निकल पड़े । रैलियाँ, प्रदर्शन, धरने होने लगे। इन ÁÙ ·¤æØüßæçãØô´ ·ð¤ दौरान लोगों ने आँसू गैस के गोलों और पानी की ÕéÀUæÇ¸Uô´ का डट कर सामना किया और पुलिस के साथ जोरदार ÛæÇ¸UŒÂð´ Üè´Ð उन्हों ने हाथों में ·é¤¼æÜô´ ·é¤ËãUæçǸUØô´ और अलग-अलग खेती यंत्रों को  ले कर पुलिस हमलों  का ×é·¤æçÕÜæ किया। ©U‹ãUô´Ùð ÜæçÆUØô´ âð शस्त्रधारी पुलिस के साथ खूब ÅUP¤ÚU Üè और अनेकों पुलिस वाहनों की तोड़-फोड की। लोगों ने पुलिस थानों, SÍæÙèØ सरकारी इमारतों और पार्टी दफ्तरों पर हमले किये। लगातार कई दिन चली ऐसी हिंसक वारदातों के द्वारा अंत लोगों ने पार्टी सैक्ट्री, SÍæÙèØ अधिकारियों  और पुलिस बिभाग के ·¤×ü¿æçÚUØô´ को गांव  से बाहर भगा दिया। गांव  के सभी रास्तों पर नाके लगा कर लोगों ने दिन  रात के पहरे शुरू कर दिए। अलग अलग Á»ãUô´ पर गड्ढे खोद कर पुलिस गाड़ियाँ के लिए L¤·¤æßÅð´U खड़ी कर दी। लोग माँग कर रहे थे कि उन की स्वीकृति के बगैर किया ßÌü×æÙ ज़मीनी सौदा रद्द किया जाये। पहले किये जमीनी सौदों का हिसाब दिया जाये। सालों से भी अधिक समय से चले आ रहे पार्टी सैक्ट्री समेत बाकी अधिकारियों  को चलता करके लोकतांत्रिक ढंग के साथ मतदान करवाया जाये।
इन ÁÙ-·¤æØüßæçãUØô´ ·ð¤ दौरान पुलिस ने आँसू गैस और पानी की बुछाड़ों के साथ लोगों को खदेड़ने की कोशिशें की। बार बार लाठीचार्ज करके अनेकों लोगों को गिरफ्तार किया। औरतों और बच्चों तक को भी नहीं छोड़ा । अंतÑ जनसमूह पुलिस ÂÚU हावी हो गया। पुलिस को भागना पड़ा । लोगों के नाक में दम करने और साहस तोड़ने के लिये नये हथकंडे ¥ÂÙæÙð पड़े। उन्होनें गांव  के मछुआरों की ·¤çàÌØæ¢ कब्ज़े में Üð ली। लोगों ·ð¤ गांव  से बाहर जाने और चावल, तेल आदि राशन की वस्तुएँ गांव  आने पर  रोक लगा दी। पानी की स्पलाई काट दी। गांव को ¥æÙð ßæÜð रास्तों पर नाके लगा कर गांव  को जेल में  तबदील कर दिया। पुलिस ने लोगों को फुसलाने के लिये प्रलोभन भी ç¼ØðÐ ÂéçÜâ नाकों पर चावल, तेल और अन्य राशन -वस्तुओं के भंडार §·¤_Uæ करके ऐलान किया कि जो लोग संघर्ष  से किनारा करने का लिखती वायदा करते हैं वह राशन ले सकते हैं। पुलिस के दलाल चावल तेल उठा कर गांव  पहुँचे। परन्तु पुलिस के यह सभी हथकंडे बार बार फेल हुए। लोगों की फ़ौलादी एकता को तोड़ा नहीं जा सका।
लोगों ने पैदल मार्ग और खेतों के बीच में से होते हुए पड़ोसी गावों से राशन पानी के प्रबंध करने शुरू कर दिए। Âæâ के गांव के लोग वूकान निवासियों ·¤æ â×ÍüÙ ·¤ÚUÙð Ü»ð ¥õÚU ßçã¢U»èØô´ ¥æç¼ ·ð¤ mæÚUæ आवश्यक वस्तुओं की स्पलाई करने लगे। नजदीकी शहर लूफैंग के सैंकड़े शहरियों ने वूकान के लोगों के âæÍ °·¤ÁéÅUÌæ के तौर पर शहर में प्रदर्शन  किया। पुलिस L¤·¤æßÅUô´ के कारण हिंसक हुए लोगों ने सरकारी दफ्तरों की तोड़ -ȤôǸU की।
अधिकारियों ने वूकान के लोगों के लिए इन्टरनेट के कुनैकशन काट कर बाहर की दुनिया से उन के संपर्क ÌôǸUÙð की कोशिश की परन्तु ग़ैर-सरकारी प्राईवेट चैनलों के द्वारा वूकान के लोगों की आवाज़ देश के लाखों, ·¤ÚUôǸUô´ Üô»ô´ तक पहुँचती रही। पुलिस नाकों से बचता बचाता बर्तानवी â׿¿æÚU, टेलीग्राफ का एक पत्रकार वूकान पहुँचने में सफल हो गया। वूकान के संघर्ष के आंखों ¼ð¹è ãUæÜÌ ·ð¤ â׿¿æÚU चीन में नैट का प्रयोग करनेवाले yz ·¤ÚUôǸU लोगों के इलावा संसार भर में फैलने लगीं। सरकार को लोगों के इस उभार के दूर दूर तक फैल जाने की चिंता ने उसे लोगों के साथ बात-चीत करने के लिए मजबूर कर दिया। पार्टी सैक्ट्री को गांव से  निकाल   देने के बाद में SÍæÙèØ सरकार ने नया सैक्ट्री नियुक्त  कर दिया था। परन्तु लोगों ने उसे भी मंज़ूर न किया । अंत लोगों के साथ बातचीत के लिए मजबूर हुई सरकार  को vx â¼SØô´ ÂÚU ¥æÏæçÚUÌ °·¤ âç×çÌ ·¤æ SßÌ¢˜æ M¤Â ×ð´ ¿éÙæß करने की लोगों को इजाज़त देनी पड़ी, जो सरकार के साथ बातचीत  करे। एक बार लोग खुश हुए और उन्हों ने vx â¼SØèØ  समिति का  चयन किया  । परन्तु एक दम फिर सरकार ने  L¤¹ Õ¼Ü çÜØæÐ । लूफैंग शहर की काउंटी सरकार ने लोगों के रोश प्रदर्शन को ग़ैर-कानूनी करार ¼ð दिया। उस ने समिति सदस्यों पर लांछन लगाए कि वे विदेशी àæç€ÌØô´ को सरकार और ग्रामीण लोगों ·ð¤ बीच दरार  डालने के लिए उकसाते हैं।
लोग फिर घरों से बाहर आ निकले और धरने पर बैठ गए। ~ दिसंबर को बिन नंबर ÂÜðÅUô´ वाली चार गाड़ियों पर सादे ·¤ÂǸUô´ में पुलिस गांव में  आई और एक रैस्टोरैंट सामने बातचीत कर रहे z समिति सदस्यों को उठा कर ले गई। इस घटना के बाद  लोगों ने नाके कस दिए। पेड़ काट ·¤ÚU गांव में दाख़िलð ·ð¤ सभी रास्ते बंद कर दिए। ÀUèÙè हुई ज़मीन पर  ÕÙæ§ü ãé§ü दीवार गिरा दी। vv दिसंबर को भारी संख्या  में गांव पर हमला करने आई पुलिस का रास्तों में काट  कर Èñ´¤·ð¤ वृक्षों ने रास्ता रोक लिया। पहरा दे रहे कम से -कम दो दर्जन वलंटियरों ने ढोल बजा कर लोगों को घरों से बाहर निकाल लिया। §·¤_Uð हुए हजारों लोगों के साथ पुलिस की दो घंटे मुट्ठ-ÖðǸU चली। लोगों ने आँसू गैस और पानी की बुछाड़ों का डट कर सामना किया। ¥¢ÌÌÑ पुलिस को गांव छोड़ कर वापस लौटना पड़ा ।
vv दिसंबर की रात को वूकान के लोगों को म्युनिसिपल सरकार की ¥ôÚU से एक मनहूस â׿¿æÚU ç×Üæ ç·¤ दो दिन पहले गिरफ्तार किये z समिति सदस्यों  में से एक, जू çÁÙÕô ·¤è दिल ·¤æ दौरा पड़ने से मौत हो गई है। कुछ पारिवारिक सदस्यों को उस की लाश दिखायी गई। जू  की इक्कीस वर्षीय बेटी अनुसार उस के पूरे शरीर की ¿×ǸUè छिली पड़ी थी, हाथ सूजे हुए थे, अंगूठे टूट कर पीछे ·¤è ¥ôÚU ×éǸðU हुए थð, उस के माथे और चेहरे पर ख़ून और ज़ख़्मों के निशान थे, उस की नथनों से ख़ून निकला हुआ था, उस ने कहा कि घोर ØæÌÙæ°¢ ¼ð ·¤ÚU मौत के घाट उतारे जाने के इस से SÂcÅU सबूत और क्या हो सकते हैं? vw दिसंबर को y®®® लोगों ने लूफैंग शहर में ज़बरदस्त प्रदर्शन करके जू की लाश की माँग की। लोगों ने माँग की कि जब तक जू की  लाश सौंपी नहीं जाती, गिरफ्तार किये सभी आदमी रिहा नहीं किये जाते और सभी ज़मीनी सौदे रोके नहीं जाते, सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं की जायेगी। म्युनिसिपल  सरकार को डर था कि ज़ू की लाश गांव जाने से लोगों के रोष और गुस्से ·¤è चिंगारी ÖǸU·ð¤»èÐ पहलें ही काबू से  बाहर हुई पड़ी हालत और ज्यादा बेकाबू हो जाएगी । लोगों ने अल्टीमेटम  दिया कि  यदि पाँच दिनों के भीतर लाश गांव को न सौंपी गई तो वह SÍæÙèØ सरकार के दफ्तरों के आगे प्रदर्शन करेंगे। भारी दबाव ×ð´ आई ãéU§ü म्युनिसिपल  सरकार को भी जू की मौत के कारणों के बारे में ¼ôÕæÚUæ Áæ¡¿ करने की लोगों की माँग मान कर उस की लाश परिवार और लोगों के हवाले करनी पड़ी। जू  की अंतिम रस्मों में |®®® लोग शामल हुए। लोगों की तरफ से एक बड़े बैनर पर लिखा हुआ था, जू -जो हमारी ज़मीनों ख़ातिर जान कुर्बान कर गया
इन दो-तीन महीनों ·ð¤ दौरान चीन के सरकारी मीडिया की ¥ôÚU से Õ¢ç¼àæô´ के बावजूद वूकान का ज़मीनी संघर्ष राष्ट्रीय °ß¢ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहा। लोग ׿¥ô के चीन को याद करने लगे। उस के नेतृत्व ãéU§ü ·ý¤æ¢çÌ को याद करने लगे। वूकान और देश के  अनेकों और स्थानों पर ज़मीनी ׿×Üô´ को ले कर हो रही घटनाओं में से  उन को ¼êâÚUè ·ý¤æ¢çÌ के नक्श दिखाई देने लगे । लोगों में फैले व्यापक असन्तोष और पूरे देश में जगह जगह ÁÙ ¥æ·ý¤ôàæ के  विस्फोटों की घटनाओं ·¤ô ¼ð¹Ìð ãéU° प्रांतीय ÌÍæ राष्ट्रीय सरकार को इस संघर्ष  की पौध का  आस-पड़ोस और दूर-दूर तक फुट पड़ने की चिंता सताने लगी। सितम्बर की ƒæÅUÙæ¥ô¢ के बाद लगातार Âæ¢ß ÌÜð से ज़मीन खिसकती Ù•æÚU आने के बावजूद सरकार  ¥ÂÙæ ¼Õ¼Õæ बनाए रखने की कोशिशें करती रही। लोगों के  आगे ÀéÅU-ÂéÅU çÚU¥æØÌô´ ·ð¤ ÂýÜôÖÙ फेंकने के साथ साथ समिति सदस्यों पर लोगों को उकसाने के दोष भी लगाती रही । परन्तु पैदा हुई गंभीर स्थिति ने चीनी ·¤ØêçÙSÅU पार्टी के पोलिट çÕØêÚUô मैंबर जाओ-àæõ´»-कांग को बोलने के लिए मज़बूर कर दिया। उस ने पुत्र-ÕãêU को सुनाने के लिये पुत्री को कहने का पैंतड़ा लेते हुए निचले अधिकारियों को âÕôçÏÌ होते बोला, ÒÒझगड़े व मतभेद पैदा होते ही निचले स्तर पर हल होने चाहिए । हमें सब अलगाववादी, और ÌôǸU-ȤôǸU की हिंसक और आतंकवादी अपराधी कार्यवाहियों को असरदार ढंग के साथ रोकने के लिए पहलकदमी करनी चाहिए। इस मामले में सभी राजनैतिक और कानूनी विभागों को —— अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिएÐÓÓ
¥¢ÌÌÑ लोगों के सशक्त-निश्चय के आगे सरकार की ãñ´U·¤Ç¸Uè टूट गयी । गुआंगडोंग की प्रांतीय सरकार वूकान के लोगों की माँगों को ©Uç¿Ì मानती हुई आगे आई। wv दिसंबर w®vv को इस के ©U“æ अधिकारी, डिपटी पार्टी सैक्ट्री ज़हू मंगूयो ·ð¤ ÙðÌëÌß ×ð´ बातचीत चली। प्रांतीय सरकार का सब से ßçÚUcÆU अधिकारी   बांग यांग, जो ऐसे Ûææ¡ÛæÅUô´ को ताकत की बजाय आपसी ÕæÌ¿èÌ द्वारा निपटारा करने में माहिर है, बातचीत में शामिल मुख्य ÃØç€Ì ÍæÐ
सफलतापूर्वक निपटी बातचीत ·ð¤ अनुसार ज़मीन हथियाने का सौदा रद्द कर दिया गया। गिरफ्तार किये सभी आदमी रिहा कर दिए गए। गांव की समिति के प्रमुख और गांव की पार्टी समिति के सैक्ट्री दोनों को ¼ से हटा कर नयी समिति के चयन का वायदा किया गया। इन पर कानूनी और ÙñçÌ·¤ ©UËÜ¢ƒæÙæ¥ô¢ असंगति , रुपए पैसे ·ð¤ घोटाले की Áæ¡¿ करने के दावे किये गए। जिन अधिकारियों ने अब तक लोगों की प्रार्थनाओं को लगातार अनदेखा किया था, वह अब लोगों के खंडित हुए  विश्वास  को दोबारा गाँठने का  प्रयास ·¤ÚUÙð ×ð´ Ü»ð ãéU° थे। उन्हों ने SÍæÙèØ अधिकारियों  को कसूरवार ¼àææüÌð हुए ज़मीन, रुपए-पैसð के हिसाब-किताब, अनुशासन ÌÍæ कानून का उल्लंघन जैसे मामलों  की प्राथमिक Áæ¡¿ ·ð¤ ¥ÙéâæÚU लोगों की बातों को ©Uç¿Ì कहा। लोगों को विश्वास में लेने के लिए ÂêÚUè ÌÚUãU Ûæé·¤ ·¤ÚU Âðàæ ¥æ ÚUãðU ØãU अधिकारी ¥Õ वूकान की जनता की हिंसक कार्यवाहियों को भी मजबूरी में की कार्यवाहियों कहने तक चले गए। जमीन बेचने का गांव  निवासियों को कभी कोई लाभ नहीं ãéU¥æ कहते हुए ©U‹ãUô´Ùð समिति सदस्यों के साथ वायदे किये कि SÍæÙèØ अधिकारियों  को भविष्य में ÂæÚU¼àæèü °ß¢ स्वच्छ हिसाब-किताब रखने ·ð¤ çÙ¼ðüàæ ç¼Øð ÁæØð´»ð, परन्तु §â सब कुछ के बावजूद लोगों का विश्वास जीतने के लिए अगले दिन गुआंगडोंग के डिप्टी पार्टी चीफ़ जहू मंगूयो को वूकान के लोगों के साथ सीधी बातचीत करने के लिए चल कर गांव जाना पड़ा। अभी Öè लोगों को संदेह है कि सरकार किये ãéU° वायदों से çȤÚU सकती है।
चेयरमैन माओ के  नेतृत्व में  ãéU§ü ¿èÙè ·ý¤æ¢çÌ के दौरान किसानों के ·ý¤æ¢çÌ·¤æÚUè çוææÁ ·ð¤ ¿ÜÌð §Ù·¤è ¥ôÚU âð çÙÖæ§ü »§ü àææÙ¼æÚU Öéç×·¤æ ÌÍæ ç¼¹æ° »° ¿×ˆ·¤æÚUô´ से भली -भाँति ¥ß»Ì ÌÍæ कामरेड माओ  की  चितावनियô´ भरे निर्देशों की अटल सच्चाईयों के भार तले राज कर रही चीनी काम्यéनिस्ट  पार्टी की मौजूदा केंद्रीय लीडरशिप ज़मीनों पर कब्जों का विरोध कर रहे किसानों में हलचल के संभावित खतरों  को ÕǸUè अच्छी तरह समझती है। पूरे देश  में  लगातार ãUô रहे बेहिसाब जन-विस्फोटों के बावजूद वूकान के लोगों का संघर्ष एक अनूठी घटना है। इस घटना ने केंद्रीय लीडरशिप के मन की भीतरी घबराहट को कई गुणा और बढ़ाया है। वूकान के लोगों के साथ किया ßÌü×æÙ समझौता उन्होंने संभावित खतरों को भाँप कर ही किया है। प्रांतीय पार्टी लीडरशिप की ¥ôÚU से जारी समस्या का उत्तरदायित्व SÍæÙèØ अधिकारियों  पर डालने की कोशिशें और इस फरवरी के आरंभ के दिनों  में चीनी प्रधान मंत्री श्री बायो की ¥ôÚU से विशेश तौर पर गुआंगडोंग प्रांत की राजधानी का किया दौरा और वहां किसानों के हितों की पहरेदारी प्रति की मीठी मीठी बातें केंद्रीय लीडरशिप की बढ़ी हुई घबराहट का मुंह बोलता सबूत हैं। इस घबराहट की वजह से ही प्रचलित ÃØßãUæÚU से विपरीत वूकान के लोगों को गांव समिति SßÌ¢˜æ M¤Â ×ð´ मनमर्ज़ी से चयन करने के किये वायदे को ÃØßãUæçÚU·¤ M¤Â ×ð´  लागू करना पड़ा है । आगे यह तो समय बतायेगा चीनी शासकों के ऐसे हथकंडे कब तक कारगर रहते हैं।



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