रेल रोको आंदोलनः
किसानों द्वारा रेलवे को हरी झंडी तथा शासक पक्ष को लाल
कपास पट्टी के रेल मार्गों से किसान-मजदूर उठे;
शासक पक्ष से गाँवों में भिड़ने का लिया प्रण
-पंजाबी ट्रिब्यून (मालवा)
14 अक्तूबर
किसान तथा मज़़दूर संगठनों ने आज
कपास पट्टी के रेल मार्ग दोपहर के समय खाली कर दिए। सात दिनों से चल रहा संघर्ष आज
समाप्त हो गया। रेलवे ने तुरंत शाम की गाडि़यों को हरी झंडी दिखा दी, जब कि किसानों ने साथ ही साथ शासक पक्ष को लाल झंडी दिखा दी है। दोपहर करीब 2 बजे बठिंडा जि़ले में बठिंडा-अंबाला, बठिंडा-बीकानेर तथा बठिंडा-सिरसा रेल मार्गों पर से आंदोलन समाप्त कर दिया। किसानों तथा मज़दूरों ने शासक
दल को कहा कि अब वे उनसे गाँवों में मिलकर जवाब मागेंगे। रामपुरा, शेरगढ तथा पथराला से नारे लगाते हुए किसान अपने-अपने गाँवों की राह की तरफ चल दिए। हर मंच से किसानों तथा खेत मज़दूरों को
सचेत किया गया कि उनके गाँवों में जब भी शासक दल के नेता पहुँचें उनका विरोध किया
जाए।
भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के जि़ला अध्यक्ष शिंगारा सिंह मान
का कहना था कि उनका संघर्ष अब नए चरण में दाखिल हो गया है। जन साधारण की समस्याओं
को देखते हुए रेल मार्ग खाली किए गए हैं। अब गाँवों में सत्तारूढ दल के नेताओं का
घिराव किया जाएगा। खेत मज़दूर यूनियन के सचिव लछमण सिंह सेवेवाला का कहना था कि अब
शासकीय पक्ष का गाँव-गाँव विरोध किया जाएगा। रेलवे को
इस आंदोलन की वजह से करीब 300 करोड़ का घाटा पड़ा है। पी.आर.टी.सी. तथा प्राईवेट ट्रोसपोर्ट को इस
आंदोलन के फलस्वरूप काफी वित्तीय मुनाफा हुआ है। पी.आर.टी.सी. की दैनिक आमदनी में 15 लाख रु. की वृद्धि हुई है। ताप बिजली घरों
में कोयले के भंडार कम पड़ गऐ हैं। लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में सिर्फ 9 दिन का कोयला बाकी बचा है। इस वजह से ही इसका एक यूनिट बंद करना पड़ा है।
-मानसा (पत्र प्रेरक)ः आठ किसान संगठनों ने रेल रोको
आंदोलन को समाप्त करते हुए आज सत्तारूढ पक्ष से सीधी टक्कर लेने का ऐलान किया है।
संगठनों का कहना है कि अब पंजाब के गाँवों मे विधायकों तथा मंत्रियों को घुसने
नहीं दिया जाएगा तथा इनका गाँवों में पहुँचने पर काली झँडियां दिख कर विरोध
प्रदर्शन किया जााएगा। किसान नेताओं ने बताया कि इस आंदोलन को नया रूप देते हुए अब
22 अक्तूबर को दशहरे वाले दिन सत्तारूढ पार्टी के मंत्रियों, विधायकों तथा सांसदों के घरों के घिराव किए जाएंगें। इस अवसर पर पंजाब किसान
यूनियन के प्रांतीय प्रधान रुलदू सिंह ने बताया कि कल चंडीगढ में मुख्यमंत्री से
बातचीत असंतोषजनक रही क्योंकि कपास की तबाही तथा बासमती की खरीद से संबंधित मुख्य
माँगों के बारे में सरकार का रुख़ पूर्णतः नकारात्मक था। भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के जि़ला अध्यक्ष ने बताया कि शेष
माँगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
-मोगा ( निजी पत्र प्रेरक ) रेल रोको आंदोलन आगामी संघर्ष के
ऐलान के साथ आज समाप्त हो गया। यहां किरती किसान यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष
निर्भय सिंह ढुडीके तथा किसान संगठन उग्राहां के नेता सुखदेव सिंह कोकरी कलां व
किसान यूनियन के जि़ला अध्यक्ष दविंद्र सिंह घाली तथा बलौर सिंह घाली ने बताया कि
अब किसान संगठन गाँवों में आने वाले अकाली नेताओं का घिराव करेंगे। उन्होंने बताया
कि 22 अक्तूबर को अकाली सांसदों, मंत्रियों तथा विधायकों की कोठियों का घिराव करने की भी योजना बनाई गई है।
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