Friday, November 6, 2015

5) संघर्ष की उठान बरकरार



किसान संघर्ष की उठान बरकरार-हुकूमत विवश

कपास की फसल बर्बादी के मुआवज़े के हक की प्राप्ति के लिए उठा किसान मज़दूर आंदोलन बादल हुकूमत के पसीने छुटा रहा है। सवा महीने से चल रहा संघर्ष अब रेल पटरियों पर पहुँच गया है। नष्ट हुई फसल के लिए प्रति एकड़ 40 हज़ार रु. खेत मज़दूरों के लिए प्रति परिवार 20 हज़ार रु. दोषी कंपनी डीलरों व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कारवाई की माँगों के साथ-साथ बासमती की सरकारी खरीद करने तथा उचित रेट देने, गन्ने की बकाया राशि तुरंत जारी करने जैसी माँगें भी अब इस आंदोलन की उभरती माँगें हैं। 7 अक्तूबर को किसानों तथा खेत मज़दूरों के काफिले सड़कों तथा रेल पटरियों पर उतर आए। पंजाब भर में लगभग 12 स्थानों पर रेलें रोकीं गईं। इनमें अमृतसर के 2 स्थानों तथा बठिंडा के 3 स्थानों के अतिरिक्त मानसा, डगरू (मोगा) फिरोज़पुर, मुक्तसर, चंद शन ( जैतो ) तथा संगरूर आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लहरागागा आदि स्थलों पर सड़क यातायात जाम किया गया। किसानों के गुस्से को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गिरफ्तारियाँ करके जगह जगह नाके लगा कर डराने धमकाने जैसे हथकंडे अपना कर रेलें चलाने का प्रयत्न किया। बरनाला, चंदभान, रामपुरा, लहरा तथा अन्य कई स्थानों से 1000 से ऊपर किसान मज़दूर गिरफ्तार किए गए। पर जन आक्रोश की ललकार के समक्ष बादल हुकूमत तथा पुलिस धमकियाँ बेबस नज़र आईं। उन्हें गिरफ्तार लोगों को छोड़ना पड़ा।
आज चैथे दिन तक पंजाब में 6 स्थानों पर रेलें रोकीं गईं जिनमंेे बठिंडा के रामपुरा, पथराला, शेरगढ, अमृतसर के मुच्छलां, मोगा के डगरू तथा मानसा मुख्य स्टेशनों में शामिल हैं।
लहरागागा में सुनाम जाखल मुख्य मार्ग जाम किया हुआ है। कपास पट्टी में चार स्थानों पर बड़ी गिनती में जनसमूह इकत्रित हुए हैं जिनमें महिलाओं की संख्या देखते ही बनती है। किसान तथा मज़दूर संगठन 10 अक्तूबर को अगले ऐक्शन का ऐलान करेंगे।
इस आंदोलन के परिणामस्वरूप अकाली दल के पैरों से ज़मीन खिसकती नज़र आ रही है और किसानों को आंदोलन में शामिल न होने की अपीलें करनी पड़ी हैं। हड़बडाई हुकूमत एक तरफ किसान संघर्ष को राजनीती से प्रेरित व माहौल बिगाड़ने की कोशिश बता रही है परन्तु दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने संगठनों को बातचीत के लिए 11 तारीख को बुला लिया है।
संघर्ष के दबाव का असर
-    किसान आक्रोश के समक्ष घबराई हुकूमत खरीद ऐजंसियों को मंडियों से धान की फसल जल्दी से जल्दी खरीदने के आदेश दे रही है। अधिकारियों के साथ बार-बार सभाएँ की जा रही हैं।
-    अब किसानों को गेहूँ बोने के समय ही बीजों पर सीधी सब्सिडी देने का ऐलान करना पड़ा है जो प्रति हैक्टेयर 1 हज़ार रु. होगी। यहां तक कि सब्सिडी का पैसा पहले 2 एकड़ वाले किसानों को बाँटने का समर्थन किया है।
-    पहले घोषित मुआवज़ा राशि को 10 करोड़ से बढ़ाकर 650 करोड़ करना पड़ा है।

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