तेल खोज क्षेत्र में
विदेशी पूंजीको नियमों से मुक्ति
पैट्रोल व डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ौत्री के कदमों के बाद, कीमतों में लगातार थोड़ी थोड़ी बढ़ौत्री करने का सिलसिला जारी रह रहा है। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में बढ़ौत्री का एक और कदम लिया गया है। जिस पैमाने पे तेल कम्पनियों के कारोबार चल रहे हैं, थोड़ी सी बढ़ौत्री भी मुनाफों में बड़ी बढ़ौत्री कर देती हैं। कीमतों को कंट्रोल-मुक्त करने की सरकारी नीती व कदम साम्राज्यवादी कम्पनियों की सेवा की बड़ी योजना का हिस्सा है। कहा तो यह जा रहा है कि अंत्रराष्टीय तेल की ऊंची कीमतों के कारण आयात के खर्चे बढ़ जाते हैं। इस करके तेल कंपनियों को घाटा पड़ता है। (इस झूठी दलील के बारे में सुर्ख रेखा के पन्नों में कई वार बात हो चुकी है) परन्तु असल बात यह है कि तेल व कुदरती गैस के क्षेत्र को अधिक से अधिक मुनाफाबखश बनाया जा रहा है। ताकि विदेशी साम्राज्यवादी इस क्षेत्र में पूंजी लगाकर व देश के श्रोतों को लूट कर भारी कमाई कर सकें। प्रभाव यह दिया जा रहा है कि भारत को तेल आयात करने की मजबूरी से मुक्त करने की कोशिश हो रही है। इस लिए विदेशी कंपनियां बुलाई जा रही हैं। ताकि तेल व कुदरती गैस धरती से निकालने का काम बड़े पैमाने पे हो सके। व तेल कीमतों का बोझ लोगों पे ना पड़े। ऐसे विदेशी पूंजी को सस्ते तेल की सप्लाई व सवै-निर्भरता की ओर जाता मार्ग बन कर पेश किया जा रहा है। यह तर्क स्वै-विरोधी है। अगर कीमतों को अंत्रराष्ट्रीय कीमतों के साथ चिपकाना है तो तेल का उत्पादन बढऩे से कीमतें कौसे घट जाएँगी? स्पष्ट है कि तेल जमीन से निकालने के लिए विदेशी कंपनियों को होकरे लगाने का मतलब है कि वे तेल के श्रोतों को मुट्ठी में करने व जी भर के मुनाफे कमाएं।
अभी अभी सरकार ने ऐलान किया है कि तेल व गैस की खुदाई के लिए लाएसेन्स देने की नीती नर्म की जा रही है, ता कि विदेशी कंपनियों का देश में पूंजी लगाने की खातिर हौसला बढ़ सके। तेल मंत्री एस. जैपाल रैड्डी ने बयान दिया है कि हम तेल खुदाई की खातिर लाइसैन्स जारी करने के अगले दौर से पहले नियमों को नर्म करने जा रहे हैं। इस खातिर आवश्यक सिफारिशें करने के लिए एक पैनल बनाया गया है। इस पैनल का मुखिया प्रधान मंत्री की सलाहकार कौंसिल का चेयरमैन है। वह अगले कुछ सप्ताहों में ही रिर्पोट पेश कर देगा। यह वही रंगराजन है, जिसने अभी अभी चीनी व्यवसाय को पूरी तरह कंट्रोल मुक्त करने की जन-दुश्मन सिफारिश की है। ऐस. जैपाल रैड्डी ने पहले ही बगैर शर्म-हया के कह दिया है कि कैबनिट कमेटी को पैनल की सिफारशें स्वीकार करनी ही होगीं।
एस. जैपाल रैड्डी विदेशी कंपनियों को खुश करने के लिए बहुत ही उताबला है। उसका कहना है कि तेल व कुदरती गैस बलाकों की बोली का अगला दौर इस वर्ष के अंदर अंदर शुरू हो जाएगा। इस से पहले पहले नियम नर्म कर दिए जाएंगे। क्या होने वाला है, इसके बारे में मंत्री ने पहले ही संकेत दे दिया है। पैनल की सिफारिशें तो केवल रसमी कार्यवाईयां हैं। रैड्डी ने कहा है कि ''पूंजी लगाने के पक्ष से भी नियमों का सिलसिला पूंजीपति-पक्षी होगा।
अभी तक विदेशी कंपनियां तेल व कुदरती गैस की खुदाई के व्यवसाय में ही भारी चली आ रही हैं। विदेशियों को पूंजी लगाने की छूट देने के बाद उनके लिए नियमों की रोक ठोक को स्माप्त किया जा रहा है। पहले कंपनियों को बताना पड़ता था कि वे तेल व गैस किस कीमतों पे बेचेंगी। उनका कीमतें निर्धारित करने का फारमूला क्या होगा। अब एसी पूछ-ताछ नहीं होगी। विदेशी साम्रज्यवादी कंपनियों का एक विशेष एतराज यह है कि परियावर्ण व सुरक्षा मंत्रालय द्वारा स्वकृति के परमिट जलदी क्यों नहीं मिलते। आसट्रेलिया की तेल-खोज कंपनी बी.एच.पी. बिनीटन ने अपनी वार्षिक रिर्पोट में भारत के बारे में कहा है कि 'भारत में तेल खुदाई को आघात इस लिए पहुंचता है कि सुरक्षा मंत्रालय से परमिट जल्दी नहीं मिलते।
अब केन्द्रीय शास्क यह सभी चिंताएं दूर करने के लिए उछल रहें हैं। तेल सेक्रेट्री जी.पी. चतुरवेदी ने साफ साफ संकेत दे दिया है कि परियावर्ण व सुरक्षा मंत्रालय की स्वकृतियां तो रसमी बातें है। चिन्ता ना करो। यह हम फटाफट लेकर देंगे। उसने कहा है कि अगले दौर की बोली शुरू होने से पहले पहले परियावर्ण व सुरक्षा मंत्रालय की स्वकृतियां हमारे हाथों में होंगी। यानि जिन बलाकों की ओर विदेशी कंपनियां ऊंगली उठाएंगी इन के सम्बन्ध में परियावर्ण व सुरक्षा की ओर कोई समस्या न होने का सर्टीफिकेट अब फटाफट मिलेगा। तेल सेक्रेट्री ने कहा है कि ठेकेदार कंपनियां दर्जन के करीब बलाकों के सम्बन्ध में मंत्रालय की स्वकृति का इन्तजार कर रही है। अब समझ लें कि यह मिली कि मिली।
यह व्यवहार जाहिर करता है कि देश के शासकों को न देश के वातावर्ण की चिन्ता है न सुरक्षा की। न ऊंची तेल कीमतों में निकलते जनता के कचूमर की। न तेल व कुदरती गैस के श्रोतों की अन्धी लूट की ना इस लूट से होने वाले देश की अर्थ-विवस्था के विनाश की।
इसका विदेशी साम्राज्यवादियों को निमंत्रण का यूं विवरण किया जा सकता है कि आएं जी भर के चूसें, जी भर के लूटें, मुनाफों से जेबें भरें। परन्तु कृप्या हमारे हिस्से का ख्याल आवश्य रखना।
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