Monday, February 2, 2026

सी.पी.आई. (माओवादी) के पूर्ववर्ती संगठन पीपुल्स वार ग्रुप की लाइन के बारे में एक टिप्पणी

 सी.पी.आई. (माओवादी) के पूर्ववर्ती संगठन पीपुल्स वार ग्रुप की लाइन के बारे में एक टिप्पणी 



देश के भीतर एक-दूसरे से टकरा रहे विभिन्न रुझानों और लाइनों में से पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) “बाएं रुझान  ("Left" Trend) का प्रतिनिधित्व करता है। आज देश में मौजूदबाएंरुझानों में यह सबसे अधिक उभरा हुआ है। PWG राष्ट्रीय स्तर की पार्टी होने का दावा करता है; एक कांग्रेस कर चुका है जिसके बारे में यह पार्टी कांग्रेस होने का दावा करता है; वर्तमान समय में एक गुरिल्ला फौज के रूप में भारतीय क्रांति की सशस्त्र शक्ति खड़ी कर लेने (फिलहाल गुरिल्ला फौज के रूप में) का दावा करता है; और विभिन्न क्षेत्रों को प्राथमिक तथा उच्च स्तर के गुरिल्ला क्षेत्रों के रूप में विकसित कर लेने का दावा करता है। शुरू में इसने अपना ध्यान एक ही राज्य पर केंद्रित किया था, लेकिन अब तक यह कई राज्यों तक फैल चुका है। देश में यह सबसे अधिक उभरा हुआ कम्युनिस्ट क्रांतिकारी ग्रुप है; और अब यह अन्य अंतरराष्ट्रीय पार्टियों के साथ संयुक्त रूप से विभिन्न प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच गठित कर, खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उभार रहा है। यह राजनीतिक हमले पर आया हुआबायां रुझान है; दूसरे ग्रुपों के साथ इसके हिंसक टकराव हुए हैं। खेमे के अंदर यह पार्टी के रुतबे से खड़े होकर बात करता है; कम्युनिस्ट क्रांतिकारी संगठनों की एकता के अमल को यह मुख्य रूप से एक ऐसे अमल के रूप में देखता है जिसमें दूसरे ग्रुपों के क्रांतिकारी तत्त्वों को इसमें शामिल होना है। लेकिन विचारधारात्मक-राजनीतिक स्तर पर इससे निपटना अधिक जटिल है, क्योंकि यह कोई साधारणबायां रुझान नहीं है। 

यद्यपि यह ग्रुप चारू मजूमदार की अगुवाई वाली सी.पी.आई. (एम.एल.) का एकल वारिस होने का दावेदार है, लेकिन साथ की साथ यह दावा भी करता है कि अपने दाँव-पेंच और अभ्यास में जन लाइन (Mass Line) को दाखिल कर इसने पहले वाली लाइन में सुधार किया है। लेकिन पीपुल्स वार ग्रुप ने जन दृष्टिकोण को समग्र रूप में अपनाए बगैर ही अभ्यास में उसके कुछ अंश शामिल किए हैं।

अपने द्वारा अपनाई गई लाइन के पक्ष से PWG ने उस पहले वालेबाएंमार्केबाज़ रुझान के भीतर मौजूद कई प्रत्यक्ष रूप से ही अयथोचित पक्षों/पहलुओं को त्याग दिया है जिनका चारू मजूमदार की अगुवाई वाली सी.पी.आई. (एम.एल.) के उदय में प्रमुख रोल था। इस पक्ष से यह पहले वालेबाएंमार्केबाज़ रुझान की महज निरंतरता नहीं है; इसने कुछ अलग लक्षण ग्रहण किए हैं। लेकिन अपनी सामान्य दाँव-पेंचक लाइन और अभ्यास में इसने पहले वालेबाएं मार्केबाज़ रुझान के केंद्रीय तत्त्व को बरकरार रखा है; यानी सशस्त्र संघर्ष और उसके विकास अमल के मुख्य तौर पर अग्रणी भूमिका वाले दस्ते के संकल्प को कायम रखा है; अधिक ठोस रूप में कहें तो जनता की क्रांतिकारी लहर को, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, खड़ा करने में सशस्त्र दस्तों की सक्रियता की विनिश्चित अहम केंद्रीय भूमिका। इस पक्ष से यह पहले वालेबाएं मार्केबाज़ रुझान से कोई गुणात्मक रूप से अलगबायां रुझान नहीं है। यह पहले वालेबाएं रुझान की ही सुधरी हुई (Reformed/Modified) शक्ल है।

इसलिए पीपुल्स वार ग्रुप के राजनीतिक अभ्यास की केंद्रीय समस्या, यानीबाएं कुराहे की समस्या, अभी भी उनकी सामान्य दाँव-पेंचक लाइन के नुक्स में से ही पैदा होती है। अगर इसबाएं कुराहे को उसके तार्किक अंजाम तक पहुँचने दिया जाए तो यह दाँव-पेंचक लाइन के मकसद को ही मात दे देगा। अपने पूर्ण साकार रूप में इसका मतलब होगा कि क्रांतिकारी प्रोग्राम को लागू करने के लिए क्रांतिकारी लहर खड़ी करने के अमल के दौरान खुद जनता द्वारा ग्रहण की गई जम्हूरी शक्ति की बजाय उससे विच्छेदित फौजी ताकत पर टेक। इसका नतीजा यह होता है किक्रांति को सशस्त्र करने के अमल का संबंध, “क्रांतिकारी जन लहर द्वाराअपनी राजनीतिक प्राप्तियों की रक्षा करने और राज्य सत्ता हथियाने के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिएखुद को सशस्त्र करने के अमल से टूट जाता है। इसलिए इस गलत संकल्प और इस अलगाव के कारण कोई सशस्त्र शक्ति जनपक्षीय तो भले ही बनी रहे, लेकिन जनता की शक्ति नहीं रहतीक्रांति के लिए सशस्त्र शक्ति तो हो सकती है, लेकिन क्रांति की सशस्त्र शक्ति नहीं हो सकती। पार्टी एक सशस्त्र पार्टी तो बन जाती है, लेकिन सशस्त्र संघर्ष की पार्टी नहीं बनतीयानी जनता के सशस्त्र संघर्ष की अगुआ और गुली नहीं बनती। ऐसा होने से पार्टी और जनता के बीच वास्तविक जम्हूरी रिश्ते का सचेत विकास रुक जाता है। इससे भी आगे, अगर पार्टी सशस्त्र है जबकि जनता मुख्य रूप से गैर हथियरबंद है तो यह स्थिति जनता के साथ जम्हूरी रिश्ते पर अवरोधक बनी रहती है। लहर के बंदूकधारी होने की बजाय जब हालत, लहर की अगुवाई बंदूक के हाथ होने वाली हो, तो खासकर सशस्त्र दस्तों के कम चेतन सदस्यों द्वारा बंदूक के दम पर जनता पर सत्ता और अधिकार शक्ति का इस्तेमाल करने का वस्तुनिष्ठ आधार (Objective Basis)  मौजूद रहता है। नतीजतन जनता के क्रांतिकारी अभ्यास के लिए उसकी जम्हूरी पहलकदमी को जुटाने और जम्हूरी ऊर्जा के बाँध खोलने के सहज अमल की उपेक्षा होती है। संबंधित पार्टी काडर का सर्वांगीण राजनीतिक विकास भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है। समस्या इस बात का अहसास कर पाने में है कि किसी कम्युनिस्ट शक्ति/पार्टी का अपना विकास वास्तव में बुनियादी जनता के क्रांतिकारी विकास के साथ विरोधी विकासी रिश्ते में बंधा होता है।

पीपुल्स वार ग्रुप के आत्मविश्वास का मुख्य स्रोत उसका यह दावा है कि उसने भारतीय क्रांति के लिए उस समय सशस्त्र शक्ति विकसित की जब ऐसी कोई शक्ति मौजूद नहीं थी। काफी कमजोर क्रांतिकारी जन लहर की स्थिति के बावजूद इस संगठन द्वारा विश्वसनीय फौजी शक्ति उभार लेना भी जनता के कुछ हिस्सों द्वारा सराहना का कारण बनता है; यह एक संकेत भी है कि जनता ने अपनी स्वाभाविक सूझ के स्तर पर इस अहम जरूरत को पहचान लिया है कि हाकिम जमातों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें फौजी ताकत चाहिए। जनता के भीतर PWG के प्रति आकर्षण का असली तत्त्व यही है। लेकिन फिर भी जनता के भीतर यह आकर्षण अभी स्वाभाविक सूझ के स्तर पर ही है, सचेत नहीं। जनता को ऐसी फौजी शक्ति की जरूरत का अहसास तो हुआ है, लेकिन अभी यह संकल्प नहीं है कि उन्हें कैसी फौजी ताकत चाहिए, उसे कैसे पैदा किया जाना चाहिए और इस कार्य में उनका अपना क्या रोल है। पीपुल्स वार ग्रुप समझता है कि यह पार्टी की फौजी शक्ति के प्रति जनता की चेतन सराहना है और जनता इस शक्ति को अपना मानती है और इसकी कदर करती है; इसे वह अपनी फौजी लाइन की पुष्टि समझता है।

लेकिन फिर भी, जनता के हिस्सों में PWG के प्रभावी रसूख का आधार इस बात में है कि सशस्त्र शक्ति पैदा करने के अमल के दौरान इस संगठन ने उत्कृष्ट क्रांतिकारी गुणों को प्रदर्शित किया है। जिस दृढ़ता और हठधर्मिता से इसने युद्धनीतिक महत्व वाले कुछ क्षेत्रों में, सबसे अधिक दबाई हुई और हाशिए पर धकेली गई आदिवासी जनता के भीतर अपना बसेरा किया और (अपने संकल्प के अनुसार) सशस्त्र बल उसारने की योजना लागू की है, उसके लिए बहुत बड़े स्तर के प्रयत्न जुटाने और साधित करने की योग्यता, इस राह में आने वाली रुकावटों को पार करने के लिए बहुत जोरदार प्रेरणा और संघर्ष, तथा ऐसे जोखिमपूर्ण उद्यम की कीमत चुकाने के लिए मानसिक तैयारी की जरूरत पड़ती है। दूसरा, घोर राजकीय दमन का सामना करते हुए और बहुत गंभीर नुकसान झेलकर भी पीपुल्स वार ग्रुप ने क्रांतिकारी पथ पर डटे रहने का हौसला दिखाया है। ये क्रांतिकारी गुण, लाइन में मौजूद गंभीर कमियों के बावजूद, एक प्रतिबद्ध क्रांतिकारी शक्ति के रूप में पीपुल्स वार ग्रुप के रसूख में बढ़ोतरी करते हैं। इनके द्वारा प्रदर्शित किये गए इन क्रांतिकारी गुणों के कारण जनता के एक हिस्से को यह भरोसा बँधता है कि यह क्रांतिकारी संगठन उनके साथ खड़ा रहेगा और उनके लिए लड़ेगा। मुख्य रूप से पीपुल्स वार ग्रुप के लिए समर्थन और सम्मान का यही स्रोत है और यही पैमाना है।

लेकिन जनता के एक हिस्से द्वारा दिखाए जा रहे इस तरह के सम्मान के आधार पर PWG खुद को इन लोगों का स्थापित अगुआ मान लेता है और उन हिस्सों पर सत्ता और अधिकार शक्ति का इस्तेमाल करता है जो ऐसा नहीं चाह रहे होते। ऐसा अमल जनता के बीच डर पैदा करता है, और लगता है कि PWG इस बात को समझने में असफल रहा है या इसे एक तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं करता। बिना शक, ऐसा डर किसी कम्युनिस्ट संगठन की एक अयोग्यता ही बनता है।

क्योंकि PWG का चोट निशाना लुटेरी जमातों के व्यक्तिगत सदस्यों से बदलकर राज्य के सुरक्षा बलों, संस्थाओं, अफसरशाही और राजनीतिक नेताओं की ओर मुड़ गया है, इसलिए दोनों पक्षों के लिए इसकी राजनीतिक कीमत काफी बढ़ गई है। राज्य द्वारा तीखे हमलों और उसके जवाब में पीपुल्स वार ग्रुप द्वारा जवाबी कार्रवाइयों के चक्र नेबाएं रुझान के लिए इस बात की तीव्रता और बढ़ा दी है कि वहअस्तित्व बनाए रखने के लिए भी, और, आगे विकास के लिए भीविभिन्न रूपों में जन समर्थन और जन भागीदारी के लिए यत्न जुटाए। इस अमल से इस ग्रुप में निम्नलिखित लक्षण सामने आए हैं।

तीखे राजकीय दमन ने इस ग्रुप को अपना भौतिक और राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए जनता का समर्थन जुटाने के यत्न करने की ओर पहले से भी अधिक धकेला है। लेकिन क्रांतिकारी जन लाइन और क्रांतिकारी जन अभ्यास की गैर-मौजूदगी/कमी के चलतेजिसके आधार पर जनता ने अपनी रक्षा के एक हिस्से के रूप में स्वाभाविक रूप से पार्टी की रक्षा भी करनी थीयह ग्रुप तीखे दबाव में गया है, और किसी भी ढंग से जन समर्थन जुटाने के लिए तनाव में गया है: इंसाफ देना, सुधार करना और निर्माण जैसे काम करना, जो जनता की अपनी अधिकार शक्ति स्थापित करने के अमल से विच्छेदित होने के कारण मुख्य रूप से सुधारवादी/अफसरशाह तरीके से होते हैं। अप्रत्यक्ष रूप में यह अमल सशस्त्र दस्तों पर जनता की निर्भरता को प्रोत्साहित करता है और सशस्त्र दस्तों और जनता के बीच दर्जाबंदी/रुतबेदारी वाले संबंधों को मजबूत करता है।

और हथियार खरीदने के लिए फंड जुटाने का भी तीखा दबाव है, ताकि राज्य के बढ़े हुए हमले का मुकाबला किया जा सके और एक विश्वसनीय फौजी ताकत के निर्माण को आगे बढ़ाया जा सके। ऐसे मकसद के लिए फंडों का मुख्य संभावी स्रोतयानी जनता से स्वैच्छिक आधार पर फंड उगाहीको सिर्फ संकेतात्मक रूप में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका कारण यह है कि जन समर्थन हासिल करने के लिए अपनाया गया पहले जिक्र किया गया रास्ता इसकी संभावना को खारिज कर देता है। (जन समर्थन हासिल करने के अपने तरीकों के कारण पार्टी की यह जरूरत है कि वहजनता का भला करती, उन्हें परोपकारी दान देती, उनके लिए निर्माण कार्य आयोजित करती हुई दिखे। यह जनता से स्वैच्छिक आधार पर भरपूर फंड जुटाने के उलट है।)

इसलिए पार्टी इस दबाव में है कि हथियार छीनने के लिए उम्मीद किए जा रहे क्रांतिकारी हमलों के अलावा भी वह पैसों के लिए अन्य कार्रवाइयाँ करे या विभिन्न प्रकार के संपर्कों के जरिए हाकिम जमाती स्रोतों जैसे ठेकेदारों और कारोबारियों का फायदा उठाए। हथियारों के लिए फंड जुटाने की ऐसी बदहवास कोशिश, राजनीतिक रूप से गलत अमलों या संपर्कों की ओर झुकाव और जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है।

राजकीय दमन के तीखे दबाव के कारण, राजनीतिक संगठन के लिए यह मुश्किल हो जाता है कि वह अपने तेजी से क्षतिग्रस्त होते और फिर निर्मित किये जा रहे सशस्त्र दस्तों को राजनीतिक-विचारधारात्मक रूप से लैस रख सके, और (इसलिए पार्टी कोअनुवादकहाकिम जमाती तत्त्वों से इनके अवसरवादी संबंधों की समस्या का सामना करना पड़ता है; इस संगठन की अपनी रिपोर्टों के अनुसार वर्तमान समय में इन भटकावों से निपटने के लिए संगठन संघर्ष कर रहा है।

कम्युनिस्ट संगठन और जन क्रांतिकारी लहर में, हाकिम जमातों के हमले का सामना करने के लिए प्रेरणा और सामर्थ्य हासिल करने की जरूरत होती है। विचारधारात्मक स्रोतों के अलावा ऐसी प्रेरणा और सामर्थ्य का ठोस स्रोत, संघर्षशील जन समूहों के साथ और उनकी पेशकदमी के साथयानी संघर्ष लहर और संगठन को विकसित करने तथा सामूहिक रूप से दमन का सामना करने के अमल के दौरान उनकी पेशकदमी के साथएकमिकता का अहसास है। क्योंकि जन क्रांतिकारी लहर की उपेक्षा से सामर्थ्य और प्रेरणा के इस टिकाऊ और विश्वसनीय स्रोत की भी उपेक्षा  होती है, जिसके परिणामस्वरूप संगठन स्वाभाविक ही, और अत्यधिक रूप में भी, व्यक्तिगत वीरता, दृढ़ता और बहादुरी को अधिक अहमियत देने की ओर झुक जाता है। (इसके साथ जुड़कर पार्टी की ओर आकर्षित होने वाले और भर्ती किए जाने वाले तत्त्व, सामूहिक लड़ाई में अंतर्निहित जन और सामूहिक वीरता तथा इसमें शामिल सामूहिक जाबते की बजाय, व्यक्तिगत वीरता की ओर खिंचे जाते हैं।)

PWG की लाइन की समस्या के कारण सामने रहे राजनीतिक नतीजों के इन नकारात्मक पहलुओं के बावजूद, मुख्य रूप से यह उनकी जन समर्थन हासिल करने की इच्छा ही है जिसने आत्म-सुधार के लिए आंतरिक दबाव पैदा करना है; जिसने उनके भीतर के कुछ हिस्सों को इस ओर धकेलना है कि वे अपनी दाँव-पेंचक लाइन के कुछ पक्षों या यहाँ तक कि उनकी सामान्य दाँव-पेंचक लाइन के केंद्रीय नुकस के बारे में सोचें और सुधार करें। वहीं दूसरी ओर जन समर्थन हासिल करने की तीव्रता और दबाव, जन समर्थन को सुविधाजनक या दक्षिणपंथी अवसरवादी अमलों के जरिए जुटाने की प्रवृत्ति को उकसाते हैं। लेकिन उनके बीच ऐसे तत्त्व मौजूद रहेंगे जो उनके क्रांतिकारी उद्देश्य के लिए इन ढंग-तरीकों में समाए खतरे देख लेंगे और एक अरसे के दौरान इन्हें व्यवस्थित ढंग से सुधारने का प्रयत्न करेंगे।

निस्संदेह एक ग्रुप या शक्ति के रूप में इसका आत्म-सुधार सिर्फ अंदर से ही हो सकता है। लेकिनबाएं रुझान के आत्म-सुधार को प्रोत्साहित करने और इसकी रहनुमाई करने वाली सबसे बेहतर बाहरी हालत, क्रांतिकारी जन लाइन (Revolutionary Mass Line) की बेहतर समझ और पकड़ रखने वाली कम्युनिस्ट क्रांतिकारी शक्तियों द्वारा इस लाइन काइसके फौजी पक्ष समेत, ऐसा दुरुस्त अभ्यास है जो पार्टी की अगुवाई और जनता की अधिकार शक्ति के अधीन क्रांतिकारी जन लहर की फौजी ताकत को तामीर करे। निस्संदेह, इस बाहरी हालत का एक हिस्सा वह विचारधारात्मक संघर्ष होगा जो इस क्रांतिकारी अभ्यास के साथ जुड़कर चलेगा।

(अंग्रेजी से अनुवाद)

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